BSP स्क्रैप चोरी मामले में CBI की एंट्री, 21 आरोपी गिरफ्तार

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114 करोड़ रुपए के स्क्रैप चोरी के अनुमान की होगी जांच, राज्य सरकार की सहमति के बाद CBI को मिला जांच का रास्ता

दुर्ग। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े कथित स्क्रैप चोरी मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंट्री हो गई है। राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) को पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी शक्तियों और क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। इसके बाद CBI मामले में पहले हुई पुलिस जांच, स्क्रैप की चोरी, उसकी आवाजाही, खरीद-बिक्री और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर सकेगी।

मामला उस समय सामने आया था, जब पुलिस ने अकलोरडीही खदान पारा स्थित एके ट्रेडर्स से करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने स्क्रैप के साथ कई वाहन और मशीनें भी जब्त की थीं। इसके बाद पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों के इस्तेमाल का आरोप

पुलिस ने शुरुआती जांच में BSP से स्क्रैप बाहर निकाले जाने के तरीके और उसके स्रोत की पड़ताल की। जांच आगे बढ़ने पर स्क्रैप की आवाजाही और उसे दूसरे स्थानों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़ी जानकारी सामने आई। पुलिस ने संजय सिंह को मामले का मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया।

जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि BSP से स्क्रैप बाहर निकालने के लिए फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद पुलिस ने स्क्रैप को बाहर निकालने और आगे खपाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की।

रायपुर पावर एंड स्टील तक पहुंची जांच

मामले की जांच का एक सिरा रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड तक पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर चोरी किए गए स्क्रैप की इस कंपनी में खपत किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई। इसके बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग (60) और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह (39) को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

अब तक 21 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक कुल 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से तीन आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि पांच आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

पुलिस की जांच में BSP से एक साल के दौरान करीब 114 करोड़ रुपए के लोहा-स्क्रैप की चोरी का अनुमान सामने आया है। हालांकि, चोरी किए गए स्क्रैप की वास्तविक मात्रा और इससे हुए आर्थिक नुकसान का अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। CBI जांच में यह भी पता लगाया जा सकता है कि वास्तव में कितने मूल्य का स्क्रैप BSP से बाहर गया और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

विधायक ने की थी केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग

वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लंबे समय से मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय इस्पात मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष समेत विभिन्न स्तरों पर पत्राचार किया था।

विधायक ने CBI के साथ ED, EOW और ACB से भी मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब राज्य सरकार की सहमति और राजपत्र में अधिसूचना के बाद CBI के लिए मामले की जांच का रास्ता खुल गया है।

स्क्रैप चोरी के पूरे नेटवर्क की होगी पड़ताल

CBI मामले से जुड़े दस्तावेजों, आरोपों और पुलिस की शुरुआती जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है। जांच में यह पता लगाने पर भी फोकस हो सकता है कि BSP से कथित तौर पर स्क्रैप किस तरीके से बाहर निकाला जाता था, उसे कहां भेजा जाता था और आगे उसकी बिक्री या खपत किस तरह होती थी।

CBI जांच की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक रिकेश सेन ने वीडियो जारी कर कहा कि BSP से राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी करने वालों को अब जांच के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने CBI जांच को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया।

फिलहाल मामले में 21 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। CBI की जांच शुरू होने के बाद अब आगे की पूछताछ और जांच में BSP से कथित तौर पर बाहर गए स्क्रैप की वास्तविक मात्रा तथा पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने का इंतजार है।

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