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बिलासपुर 29 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में किसानों की जमीन के उपयोग को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि बिना विधिवत भूमि अधिग्रहण किसी की जमीन का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे कानून के अनुसार पूरा मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार मिलेगा। इसी मामले में हाईकोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को विशेष राजस्व टीम गठित कर 30 दिनों के भीतर विवादित भूमि का दोबारा सीमांकन कराने का निर्देश दिया है।
यह आदेश जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने बिलासपुर जिले के बोदरी तहसील अंतर्गत ग्राम मुढ़ीपार निवासी सीमा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता सीमा शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि वह ग्राम मुढ़ीपार स्थित खसरा नंबर 352/5 की करीब 0.25 एकड़ कृषि भूमि की वैध मालिक हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान उनकी जमीन का उपयोग कर लिया गया, जबकि न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई गई और न ही उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया।याचिका में उन्होंने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा, पुनर्वास लाभ और 18 प्रतिशत ब्याज देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि विवाद की मुख्य वजह जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमांकन है। सभी पक्षों ने माना कि दोबारा सीमांकन होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में शामिल हुई थी या नहीं।
हाईकोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और संबंधित पटवारी की संयुक्त टीम गठित कर 30 दिनों के भीतर विवादित भूमि का पुनः सीमांकन कराया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया दोनों पक्षों की उपस्थिति में पूरी की जाए ताकि किसी प्रकार का विवाद न रहे।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि जांच और सीमांकन में यह साबित होता है कि याचिकाकर्ता की भूमि का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में किया गया है, तो संबंधित प्राधिकरण को वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए मुआवजा और अन्य लाभ प्रदान करने होंगे।
हाईकोर्ट ने सीमांकन रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर पूरे मामले का अंतिम निराकरण करने का निर्देश भी दिया है। अदालत के इस आदेश से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन सरकारी परियोजनाओं में उपयोग होने के बावजूद मुआवजा नहीं मिला है।


