पशु किसी अन्य वाहन में ले जाए जा रहे थे, केवल एस्कॉर्ट करने के आधार पर क्रेटा को जब्त रखना उचित नहीं
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कृषि पशु परिवहन से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए जब्त की गई क्रेटा कार को अंतरिम हिरासत में छोड़ने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 6 के तहत जब्ती और वाहन को रिहा न करने का प्रतिबंध उसी वाहन पर लागू होगा, जिसका इस्तेमाल कृषि पशुओं के परिवहन के लिए किया गया हो। केवल इस आधार पर किसी दूसरे वाहन पर यह प्रावधान स्वतः लागू नहीं किया जा सकता कि वह कथित तौर पर पशु ले जा रहे वाहन के साथ या एस्कॉर्ट के रूप में चल रहा था।
यह आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने 11 सितंबर 2026 को सूर्यजीत पटेल की ओर से दायर आपराधिक विविध याचिका (सीआरएमपी संख्या 1663/2026) पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने बलरामपुर-रामानुजगंज के सत्र न्यायाधीश द्वारा 23 मई 2026 को दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने पंजीयन क्रमांक CG-04-LD-3949 वाली क्रेटा कार को सुपुर्दनामा अथवा अंतरिम हिरासत में देने से इनकार किया था।
सात कृषि पशुओं को दूसरे वाहन में ले जाने का मामला
मामले के अनुसार पुलिस ने सात कृषि पशुओं को ले जा रहे एक वाहन को रोका था और इस संबंध में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। इसी दौरान क्रेटा कार को अलग स्थान पर रोका गया और उसके चालक को भी मामले में आरोपी बनाया गया। बाद में क्रेटा को जब्त कर लिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि क्रेटा कार का इस्तेमाल कृषि पशुओं को ले जाने के लिए नहीं किया जा रहा था। इसलिए 2004 के अधिनियम की धारा 6 के आधार पर वाहन को लगातार जब्त रखना उचित नहीं है।
वहीं, राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि क्रेटा कार का इस्तेमाल उस वाहन को एस्कॉर्ट करने के लिए किया जा रहा था, जिसमें कथित तौर पर कृषि पशुओं को ले जाया जा रहा था।
धारा 6 की भाषा पर हाईकोर्ट ने दिया जोर
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 6 के प्रावधानों की समीक्षा की। न्यायालय ने पाया कि जब्ती संबंधी प्रावधान उस वाहन से संबंधित है, जिसका उपयोग कृषि पशुओं के परिवहन के लिए किया गया हो। मौजूदा मामले में पशु क्रेटा कार में नहीं मिले थे, बल्कि उन्हें दूसरे वाहन में ले जाया जा रहा था।
न्यायालय ने कहा कि दंडात्मक प्रावधानों की व्याख्या सख्ती से की जानी चाहिए और किसी व्यक्ति या संपत्ति को केवल अनुमान के आधार पर किसी दंडात्मक प्रावधान के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख किया। इनमें डब्ल्यू.एच. किंग बनाम रिपब्लिक ऑफ इंडिया तथा पश्चिम बंगाल राज्य बनाम स्वपन कुमार गुहा के फैसले शामिल हैं। इन फैसलों के माध्यम से दंडात्मक प्रावधानों की वैधानिक भाषा की सख्त व्याख्या के सिद्धांत पर जोर दिया गया।
इसके अलावा गुजरात हाईकोर्ट के रविदासभाई सेगजीभाई वासावा बनाम गुजरात राज्य मामले के फैसले का भी संदर्भ लिया गया, जिसमें पशु संरक्षण कानून के तहत जब्त वाहन से संबंधित प्रावधानों की व्याख्या की गई थी।
लंबे समय तक जब्त वाहन रखने पर भी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने जब्त वाहनों की अंतरिम रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य मामले में दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब्त वाहनों को लंबे समय तक पुलिस थानों में पड़े रहने देने से उनका नुकसान और मूल्यह्रास हो सकता है। ऐसी स्थिति में उचित शर्तों, बांड और आवश्यकता पड़ने पर वाहन प्रस्तुत करने की शर्त के साथ अंतरिम हिरासत दी जा सकती है।
10 दिन के भीतर वाहन छोड़ने का निर्देश
हाईकोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में धारा 6 के आधार पर क्रेटा को लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है। न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि अपराध 24 फरवरी 2026 को दर्ज हुआ था और आदेश के समय लगभग छह महीने बीत चुके थे।
इसके बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह उचित शर्तों के अधीन क्रेटा कार की अंतरिम हिरासत याचिकाकर्ता को प्रदान करे। निचली अदालत की शर्तों का पालन किए जाने पर आदेश प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर वाहन रिहा करने का निर्देश दिया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले में आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण नहीं करता है। इसका प्रभाव केवल जब्त क्रेटा कार की अंतरिम हिरासत और रिहाई तक सीमित है। याचिका को इसी सीमा तक स्वीकार किया गया।


