छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने PIO, प्रथम और द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण के आदेश किए रद्द, 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत विभागीय जांच से संबंधित जानकारी को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने कहा कि यदि मांगी गई जानकारी कर्मचारी की अपनी विभागीय जांच से संबंधित है और वह अपने बचाव के लिए उसे मांग रहा है, तो केवल RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब उस जानकारी में किसी तीसरे पक्ष की निजता का अनुचित उल्लंघन शामिल न हो।
विभागीय जांच के बाद खत्म कर दी गई थी नौकरी
मामला जांजगीर के फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के पद पर कार्यरत कर्मचारी अक़राम खान से जुड़ा है। उनके खिलाफ कुछ आरोपों को लेकर दो विभागीय जांच शुरू की गई थीं। उन पर गलत व्यवहार से संबंधित सात आरोप लगाए गए थे। जांच पूरी होने के बाद फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज ने 5 जनवरी 2021 को उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया।
कर्मचारी ने इस आदेश को विभागीय अपील के जरिए चुनौती दी। उनका कहना था कि उन्हें अपना पक्ष रखने और प्रभावी तरीके से बचाव करने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
RTI के जरिए मांगे थे जांच से जुड़े दस्तावेज
याचिकाकर्ता ने अपनी विभागीय जांच और उस ऑफिस मेमो से संबंधित जानकारी व दस्तावेज RTI के तहत मांगे, जिसके आधार पर उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया था। उनका तर्क था कि ये दस्तावेज न तो गोपनीय हैं और न ही किसी तीसरे पक्ष से संबंधित हैं। जानकारी का उद्देश्य केवल उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ प्रभावी बचाव प्रस्तुत करना था।
हालांकि, जन सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रथम अपील और फिर दूसरी अपील भी खारिज कर दी गई। इसके बाद कर्मचारी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने कहा- तीसरे पक्ष की निजता प्रभावित नहीं हो रही
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि मांगी गई जानकारी ऐसी नहीं थी, जिसके खुलासे से संसद या राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार का उल्लंघन होता हो। अदालत ने यह भी पाया कि जानकारी किसी ऐसी व्यक्तिगत सूचना से संबंधित नहीं थी, जिससे याचिकाकर्ता का कोई संबंध या हित न हो या जिससे किसी तीसरे पक्ष की निजता का अनुचित उल्लंघन होता हो।
अदालत ने माना कि कर्मचारी अपनी ही विभागीय जांच से संबंधित रिकॉर्ड अपने बचाव के लिए मांग रहा था। ऐसे में RTI Act की धारा 8 के तहत सूचना रोकने के लिए दिए गए आधार उचित नहीं थे।
एक ही अधिकारी के सामने अपील पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि सेवा समाप्ति का आदेश उसी अधिकारी ने पारित किया था, जिसने पहली अपील पर फैसला किया। अदालत ने इसे निष्पक्ष कार्यवाही के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना।
कोर्ट ने जन सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकरण और द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण द्वारा जानकारी रोकने संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया।
30 दिनों में जानकारी देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि RTI Act के तहत जरूरी शुल्क का भुगतान किए जाने के बाद याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने अधिमानतः आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर जानकारी देने को कहा।
इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने अक़राम खान की रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
मामला: Akram Khan बनाम Central Information Commissioner एवं अन्य



