
बिलासपुर 15 मई 2026। आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने सचिव को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीपी साहू की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2025 को राज्य सरकार को आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति राशि के संबंध में उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। याचिका में इसे अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना बताया गया है
अदालत ने सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा सचिव से पूछा है कि पूर्व आदेश के पालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि सरकार ने इस मुद्दे पर निर्णय लेने में देरी क्यों की।
याचिका में बिलासपुर निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने बताया कि वर्ष 2011 से अब तक आरटीई के तहत प्रति छात्र केवल 7 हजार रुपए की प्रतिपूर्ति राशि दी जा रही है। पिछले 14 वर्षों में इस राशि में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि स्कूल संचालन की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षकों का वेतन, बिजली-पानी, भवन रखरखाव और अन्य शैक्षणिक खर्चों में कई गुना वृद्धि हो चुकी है, लेकिन प्रतिपूर्ति राशि पुराने स्तर पर ही बनी हुई है।
निजी स्कूल संचालकों ने यह भी दावा किया कि अन्य राज्यों में आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में वर्तमान राशि में स्कूलों का संचालन करना बेहद कठिन हो गया है। उनका आरोप है कि लंबे समय से सरकार के समक्ष यह मांग रखी जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
इधर, हाईकोर्ट के आदेश के पालन की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन शुरू कर रखा है। आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने शासन की ओर से भेजे जा रहे पत्रों और नोटिसों का जवाब देना बंद कर दिया है। इसके अलावा आरटीई के तहत नए प्रवेश नहीं देने का भी निर्णय
