
बोरे में बंद कर खंडहर में फेंका था, जिंदा मिली थी बच्ची; CCTV, DNA और गवाही बनी अहम कड़ी
दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में साढ़े 4 साल की मासूम से दुष्कर्म और उसकी हत्या की कोशिश के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता (40) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना के 153 दिन बाद 25 सितंबर को फैसला सुनाया गया, जबकि सजा का आदेश 26 सितंबर को जारी हुआ।
मामला 10 अप्रैल 2026 का है। बच्ची दोपहर करीब 11.30 बजे अपनी दादी से 5 रुपए लेकर घर के पास की दुकान पर खाने का सामान लेने निकली थी। आरोप है कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले गया। दुकान के पास लगे CCTV कैमरे में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिया।
घटना के बाद आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाकर गला घोंटने की कोशिश की। बच्ची बेहोश हो गई तो आरोपी ने उसे मृत समझ लिया। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से बच्ची को तकिया कवर और जूट की बोरी में बंद कर घर के पीछे स्थित खंडहर में फेंक दिया।
बोरे से पैर बाहर दिखा तो युवकों को हुआ शक
काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजन और मोहल्ले के लोग उसकी तलाश करने लगे। इसी दौरान दो युवकों ने खंडहर में एक बोरे से बच्ची का पैर बाहर निकला देखा। बोरा खोलने पर बच्ची लहूलुहान हालत में मिली। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था और लोगों ने थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया था।
15 दिन में पुलिस ने पेश किया चालान
शिकायत के बाद उतई पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। उसे अगले दिन अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर 25 अप्रैल को चालान पेश कर दिया।
मामले में आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर, जूट की बोरी, बच्ची के कपड़े और आरोपी के कपड़े बरामद किए गए। इनकी फोरेंसिक जांच और DNA मिलान कराया गया। चिकित्सकीय जांच में बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच, अंदरूनी चोट और अधिक रक्तस्राव के साक्ष्य सामने आए।
कोर्ट में बच्ची ने आरोपी की पहचान की
मामले की सुनवाई के दौरान बच्ची ने पर्दे के पीछे खड़े आरोपी धनेश्वर साहू की पहचान की और घटना के संबंध में बयान दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से CCTV फुटेज, DNA रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और बच्ची की गवाही समेत अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और साक्ष्य छिपाने से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। आरोपी को आजीवन कारावास के अलावा 7 वर्ष, 10 वर्ष और 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजाएं भी दी गई हैं। विभिन्न धाराओं में कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2), पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड) के साथ धारा 6 तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत कार्रवाई की गई थी।

