
बालोद जिले की गुँडरदेही तहसील के ग्राम बघमरा में आदिवासी भूमि के खरीद-बिक्री का एक मामला पिछले 20 वर्षों से लंबित है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 में भूमि का सौदा हुआ था, लेकिन भूमि हस्तांतरण के लिए आवश्यक कलेक्टर की अनुमति आज तक नहीं मिल सकी। इसके चलते पूरा प्रकरण अधर में लटका हुआ है।
बताया जा रहा है कि नियमानुसार संबंधित पक्षों ने कलेक्टर से अनुमति के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी मामले का निराकरण नहीं हो पाया। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल खरीददार के कब्जे में भूमि
कलेक्टर अनुमति नहीं मिलने के कारण खरीददार अमजद अली के द्वारा भूमि को कब्जा कर लिया गया खरीदार का कहना है कि 20 वर्ष पूर्व सऊदी में भूमि स्वामी को नगद 12 लाख रुपए दे दिया गया था इसकी वजह से मेरे द्वारा कब्जा किया गया है
सौदे की राशि वापस करने की के लिए तैयार भूमि स्वामी
भूमि स्वामी सुरेश ध्रुव का कहना है कि इतने लंबे वर्षों से खरीदी बिक्री का मामला लंबित है जिससे मैं काफी परेशान हूं खरीददार को मै सौदे का पूरा पैसा वापस करने को तैयार हूं आज दिनांक को मेरे द्वारा मेरे स्वयं की भूमि पर बुवाई किया जा रहा है जिसकी जानकारी संबंधित थाने को दे दी गई है
ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे समय तक मामला लंबित रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रकरण की शीघ्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि दोनों पक्षों को न्याय मिल सके।
एवं इस तरह की आदिवासी भूमि को किसी भी को बेचे जाने के लिए रोक लगाई जाय
