बिलासपुर, 23 मई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 के चर्चित विराट सराफ अपहरण एवं फिरौती मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों की “पूर्ण एवं अटूट श्रृंखला” प्रस्तुत कर यह साबित कर दिया कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत बच्चे का अपहरण किया था।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने नीता सराफ, राजकिशोर सिंह, अनिल सिंह, सतीश शर्मा और हरेकृष्ण कुमार की ओर से दायर आपराधिक अपीलों को खारिज कर दिया। यह अपीलें बिलासपुर के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर की गई थीं।
हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रखा था और 15 मई 2026 को अपना निर्णय सुनाया। मामला बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 145/2019 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 365, 368, 364-ए, 120-बी और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
रिश्तेदार ने रची थी साजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस अपहरण की मुख्य साजिशकर्ता नीता सराफ थी, जो पीड़ित परिवार की करीबी रिश्तेदार थी और परिवार की आर्थिक एवं निजी परिस्थितियों की पूरी जानकारी रखती थी। जांच में सामने आया कि आर्थिक तंगी और कर्ज के चलते आरोपियों ने पहले किसी अन्य रिश्तेदार के बच्चे को अगवा करने की योजना बनाई थी, लेकिन परिवार के शहर से बाहर चले जाने के बाद उन्होंने नाबालिग विराट सराफ को निशाना बनाया।
बताया गया कि आरोपियों ने अपहरण से पहले इलाके की रेकी की थी। 20 अप्रैल 2019 को बच्चे को घर के पास खेलते समय अगवा किया गया। पहले उसे वैगन-आर कार और बाद में डस्टर वाहन से बिलासपुर के जरहाभाटा क्षेत्र स्थित पन्ना नगर ले जाया गया, जहां राजकिशोर सिंह के मकान में उसे एक कमरे में बंद कर रखा गया था।
6 करोड़ की फिरौती मांगने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने बच्चे के हाथ-पैर बांध दिए थे और उसकी आवाज रिकॉर्ड कर पीड़ित के पिता विवेक सराफ से 6 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। इसके लिए फर्जी दस्तावेजों से लिए गए सिम कार्ड और पुराने कीपैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से कॉल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
पुलिस रेड में सुरक्षित मिला बच्चा
26 अप्रैल 2019 को पुलिस ने राजकिशोर सिंह के घर में छापा मारकर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। मौके पर हरेकृष्ण कुमार और सतीश शर्मा भी मौजूद पाए गए। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज, वाहन, सिम कार्ड, वॉयस रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, आईएमईआई डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 54 गवाह पेश किए और 191 दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। इनमें फिंगरप्रिंट रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी रिकॉर्ड, पहचान परेड और धारा 65-बी के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र भी शामिल थे।
बचाव पक्ष ने उठाए थे कई सवाल
बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी कि मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में कई प्रक्रियात्मक खामियां हैं। साथ ही पहचान परेड और कॉल रिकॉर्डिंग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए। आरोपियों ने यह भी कहा कि फिरौती के लिए अपहरण की धारा 364-ए के आवश्यक तत्व साबित नहीं होते, क्योंकि बच्चे को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने कहा- परिस्थितियों की श्रृंखला पूरी तरह साबित
खंडपीठ ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, फिरौती कॉल, पीड़ित की बरामदगी और आरोपियों की गतिविधियों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य मामलों में प्रत्येक कड़ी का ठोस रूप से स्थापित होना जरूरी है और इस मामले में अभियोजन पक्ष ऐसा करने में सफल रहा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक षड्यंत्र केवल प्रत्यक्ष साक्ष्य से ही नहीं, बल्कि आरोपियों के समन्वित व्यवहार, कॉल रिकॉर्ड और परिस्थितियों से भी सिद्ध किया जा सकता है।
डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाईकोर्ट के इस फैसले को डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आधुनिक आपराधिक मामलों में मोबाइल निगरानी, सीसीटीवी और साइबर फोरेंसिक अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अदालत ने यह भी दोहराया कि आईपीसी की धारा 364-ए जैसे गंभीर अपराधों में न्यायालय सख्त दृष्टिकोण अपनाते हैं, क्योंकि यह संगठित अपराध और फिरौती जैसे मामलों से जुड़ा प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान मौजूद है।


