
दुर्ग, 10 जून 2026। जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना को लेकर प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिले के 25 गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन, नामांतरण तथा भूमि उपयोग परिवर्तन पर अगली सूचना तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार यह निर्णय डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और परियोजना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में अब किसी भी प्रकार के भूमि संबंधी लेन-देन बिना प्रशासनिक अनुमति के नहीं किए जा सकेंगे।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश की महत्वाकांक्षी रेल माल परिवहन परियोजनाओं में से एक है। प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई लगभग 2100 से 2200 किलोमीटर होगी, जो पश्चिम बंगाल के दानकुनी से शुरू होकर झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात तक फैलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद भिलाई स्टील प्लांट, सीमेंट उद्योग, खनिज आधारित इकाइयों तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली माल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
अत्यावश्यक मामलों में मिलेगी राहत
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को अत्यावश्यक कारणों से भूमि संबंधी कार्य कराना आवश्यक हो, तो वह कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित विभागों और परियोजना एजेंसी से प्राप्त अभिमत के आधार पर मामले-दर-मामले निर्णय लिया जाएगा।
तीन तहसीलों के 25 गांव प्रतिबंध के दायरे में
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार दुर्ग जिले की तीन तहसीलों के कुल 25 गांवों को प्रतिबंधित क्षेत्र में शामिल किया गया है।
दुर्ग तहसील
बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई और डुमरडीह।
पाटन तहसील
परेवाडीह, पहंडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह और बटंग।
भिलाई-3 तहसील
सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा और उरला।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के भू-स्वामियों और नागरिकों से आदेश का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन तथा भविष्य में भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।


