कथित सीक्रेट डायरी में नाम आने के बाद विधायक देवेंद्र यादव से ईओडब्लू की पूछताछ

Spread the love

भिलाई। प्रदेश के चर्चित कोल लेवी मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव से करीब दो घंटे पूछताछ की। ईओडब्लू के समन के बाद विधायक को जांच एजेंसी के कार्यालय बुलाया गया था। पूछताछ पूरी होने के बाद वे वापस लौट गए।

कथित डायरी में नाम का दावा

जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई कथित डायरी में विधायक देवेंद्र यादव का नाम सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी इस डायरी में दर्ज कथित लेन-देन से जुड़ी जानकारी की पड़ताल कर रही है। इसी सिलसिले में विधायक को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

पूछताछ के दौरान ईओडब्लू ने कथित लेन-देन और डायरी में दर्ज जानकारी से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर सवाल किए। देवेंद्र यादव ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। जांच एजेंसी आवश्यकता के अनुसार उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुला सकती है। इससे पहले शुक्रवार को समन तामील कराने के लिए जांच एजेंसी का एक सिपाही भिलाई पहुंचा था।

राजनीतिक फंडिंग और संपत्तियों में रकम के इस्तेमाल के आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित कोल लेवी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक फंडिंग, रिश्वत और संपत्तियों की खरीद में किए जाने के आरोप हैं। ईओडब्लू ने अपनी जांच तथा ईडी से प्राप्त जानकारी के आधार पर मामले में नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए हैं। इस मामले में अदालत में चार्जशीट भी पेश की जा चुकी है।

जांच एजेंसियों ने सूर्यकांत तिवारी को कथित अवैध कोल लेवी वसूली सिंडिकेट का मुख्य सरगना बताया है। मामले में ईओडब्लू ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

व्हाट्सएप ग्रुप और कोडवर्ड के इस्तेमाल का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित लेन-देन और वसूली से जुड़ी गतिविधियों के लिए व्हाट्सएप पर ‘पाल’, ‘दुर्ग’, ‘वीकली’, ‘टावर’ और ‘जुगनू’ नाम से ग्रुप बनाए गए थे। आरोप है कि इन ग्रुपों में कोडवर्ड के जरिए कथित लेन-देन और वसूली से संबंधित गतिविधियां संचालित की जाती थीं।

540 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली का दावा

जांच एजेंसियों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से प्रति टन कोयला परिवहन पर 25 रुपए की कथित अवैध लेवी वसूली जाती थी। जांच में आरोप लगाया गया है कि खनन विभाग की परमिट व्यवस्था में बदलाव के बाद ऑनलाइन मिलने वाले कोल परमिट को ऑफलाइन किया गया और इसके जरिए कथित सिंडिकेट ने परमिट व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित कर वसूली का तंत्र खड़ा किया।

ईडी और ईओडब्लू की जांच के अनुसार, इस कथित व्यवस्था के जरिए 540 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और विधायक देवेंद्र यादव से हुई पूछताछ को इसी जांच की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?