600+ अंक मिलने का दावा, लेकिन कोर्ट ने कहा—ठोस सबूत के बिना गंभीर आरोप स्वीकार नहीं
बिलासपुर/रायपुर, 5 अगस्त। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने NEET (UG) 2026 के एक अभ्यर्थी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपनी ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी परीक्षा अभिलेखों में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप केवल संदेह, अनुमान या व्यक्तिगत आकलन के आधार पर स्वीकार नहीं किए जा सकते। ऐसे मामलों में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।
याचिकाकर्ता आर्यन अग्रवाल ने दावा किया था कि परीक्षा के बाद डाउनलोड की गई स्कैन की गई OMR शीट में कई उत्तर उन उत्तरों से अलग थे, जिन्हें उन्होंने परीक्षा के दौरान भरा था। उनका कहना था कि उन्हें 600 से अधिक अंक मिलने चाहिए थे, जबकि परिणाम में केवल लगभग 200 अंक दिए गए।
NTA ने उठाया शिकायत निवारण प्रक्रिया का मुद्दा
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभ्यर्थी ने उच्च न्यायालय आने से पहले उपलब्ध आधिकारिक शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग नहीं किया। एजेंसी का तर्क था कि निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे रिट याचिका दायर करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप केवल स्कैन की गई OMR शीट और स्वयं तैयार किए गए चार्ट की तुलना पर आधारित हैं, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी परीक्षा रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों को केवल अनुमान या व्यक्तिपरक विश्वास के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाएं।
पहले शिकायत निवारण तंत्र अपनाना जरूरी
अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत मांगने से पहले परीक्षा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग किया जाना चाहिए। यदि यह साबित न हो कि वह व्यवस्था अप्रभावी या अनुपलब्ध थी, तो सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं माना जा सकता।
पूर्व फैसलों का भी दिया हवाला
खंडपीठ ने अपने पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि OMR शीट में कथित विसंगतियों के संबंध में केवल निराधार आरोप संवैधानिक न्यायालय के हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकते। साथ ही, याचिकाकर्ता द्वारा उद्धृत बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को वर्तमान मामले में लागू नहीं माना गया।
याचिका खारिज
सभी तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मनमानी, अवैधता, दुर्भावनापूर्ण आचरण या प्रक्रियात्मक अनियमितता सिद्ध करने में असफल रहा। इसके चलते मूल OMR शीट प्रस्तुत कराने और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग अस्वीकार करते हुए रिट याचिका बिना किसी लागत के खारिज कर दी गई।
मामले की प्रमुख जानकारी
- मामला: आर्यन अग्रवाल बनाम राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) एवं अन्य
- केस संख्या: WPS No. 3949/2026
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल
- निर्णय की तिथि: 30 जुलाई 2026
निष्कर्ष: यह फैसला स्पष्ट करता है कि परीक्षा परिणाम या OMR शीट में गड़बड़ी के आरोपों पर न्यायालय तभी हस्तक्षेप करेगा, जब आरोपों के समर्थन में ठोस, विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं तथा उपलब्ध वैधानिक शिकायत निवारण प्रक्रिया का पहले पालन किया गया हो।

