साईंस कालेज, दुर्ग में कारगिल विजय दिवस समारोह आयोजित ,कारगिल विजय हमारे देश की शान की प्रतीक : टोप लाल वर्मा

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दुर्ग। कारगिल विजय हमारे देश की शान की प्रतीक है। आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व हुये कारगिल युध्द में 527 भारतीय सेना के जवानों की शहादत पूरा देश कभी नहीं भूल सकता। हममे से प्रत्येक नागरिक को देश के लिये कुर्बान होने हेतु सदैव तैयार रहना चाहिये। ये उद्‌गार पूर्व प्राध्यापक एवं समाजिक चिंतक श्री टोप लाल वर्मा ने शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में राधा कृष्णन सभागार में व्यक्त किये। श्री वर्मा आज साईंस कालेज, दुर्ग के एन.एस.एस. एवं एन.सी.सी. इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कारगिल विजय दिवस समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। कारगिल युध्द के संबंध में तिथिवार विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए श्री टोप लाल वर्मा ने बताया कि हमारे छत्तीसगढ़ के माटी के सपूत कौशल यादव ने 25 जुलाई 1999 को युध्द में लड़ते हुए अंतिम बिदा ली। मात्र 30 साल की उम्र में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर करते हुए 5 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। श्री वर्मा ने उपस्थित प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से आग्रह किया कि उनके जीवन में देश प्रथम की भावना होनी चाहिए।

राष्ट्रगान, राज्यगीत, माता सरस्वती की पूजन तथा अतिथियों के श्रीफल एवं शॉल के साथ आरंभ हुये कारगिल विजय दिवस समारोह में साइंस कॉलेज, दुर्ग के 24 एन.सी.सी. कैडेट्स ने कारगिल युध्द पर आधारित मार्मिक नृत्य नाटिका पर प्रस्तुत की। नृत्य नाटिका में भारत पाक सैनिकों का युध्द एवं कारगिल पर भारतीय सैनिकों की विजय का मार्मिक चित्रण किया गया था। अपने स्वागत भाषण में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों एवं रामचरित मानस की चौपाईयों के माध्यम से भारतीय वीर सिपाहियों की वीरता का उल्लेख किया। कार्यक्रम के संयोजक, इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय थे। कार्यक्रम की संचालक डॉ. ज्योति धारकर ने कारगिल में शहीद हुये सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।

दुर्ग संभाग के उच्चशिक्षा विभाग की अपर संचालक डॉ. अनुपमा अस्थाना ने कारगिल युध्द के शिलशिलेवार जानकारी देते हुए बताया कि कैप्टन विजय बत्रा एवं अन्य वीर सैनिकों ने किस प्रकार अपने जान की परवाह किये बिना प्राण न्यौछावर कर दिये। कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन.पी. दीक्षित ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से कारगिल युध्द से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। डॉ. दीक्षित ने कारगिल युध्द में सहभागी मेजर जर्नल बक्शी तथा लेप्टिनेंट कर्नल पी.के. सहगल के साथ अपने अनुभव को उपस्थित दर्शकों के साथ साझा किया। डॉ. दीक्षित ने उपस्थित विद्यार्थी समूह से लक्ष्य आधारित शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने का आग्रह करते हुए कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में सोशल मीडिया में बहुत सी जानकारियां भ्रामक होती है। समारोह के दौरान महाविद्यालय में कारगिल दिवस से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं मेंडल भी प्रदान किये गये। इनमें सामूहिक देश भक्ति गान में नीता ध्रुव एवं साथी प्रथम तथा आडिल, देवांशी, डोमेन्द्र एवं दिशा द्वितीय रहे। देश भक्ति गीत एकल प्रतियोगिता में हरीश साहू प्रथम, नीलम द्वितीय तथा नकुल तृतीय रहे। इसी प्रकार एकल देश भक्ति गायन में सोमेश प्रथम, सुनिधि राजपूत द्वितीय तथा प्रिया निषाद तृतीय रहे। पेंटिंग प्रतियोगिता में शिवा ने प्रथम, खुशी प्रजापति ने द्वितीय तथा द्रविण के. देशमुख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तरूण साहू ने किया।

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