पिता का स्ट्रीट फूड व्यवसाय, बेटे ने छुआ वैश्विक मंच: साइंस कॉलेज दुर्ग के छात्र आदित्य का यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में चयन

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दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के छात्र आदित्य रामटेके ने अपनी उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि से महाविद्यालय और दुर्ग जिले का गौरव बढ़ाया है। शंकर नगर, दुर्ग के एक साधारण परिवार से आने वाले आदित्य का चयन यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में व्यवसाय नवाचार एवं उद्यमिता (Business Innovation and Entrepreneurship – M.Sc.) में उच्च शिक्षा के लिए हुआ है। यह उपलब्धि उनके परिवार के साथ-साथ उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय विश्व के प्रतिष्ठित एवं शोध-केंद्रित विश्वविद्यालयों में शामिल है और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रसेल समूह का सदस्य है। विश्वविद्यालय अपनी उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध उत्कृष्टता और नवाचार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग के अनुसार विश्वविद्यालय को ब्रिटेन में 8वां तथा विश्व स्तर पर 57वां स्थान प्राप्त है। शोध की गुणवत्ता के क्षेत्र में भी इसे ब्रिटेन के शीर्ष विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त है। विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं शोध परंपरा का संबंध 13 नोबेल पुरस्कार विजेताओं से रहा है। इसके अतिरिक्त, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय सस्टेनेबल स्टार्टअप, नवाचार और प्रौद्योगिकी-आधारित साझेदारियों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आदित्य की उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनका चयन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2025–26 के चयन वर्ष के लिए हुआ है। इस छात्रवृत्ति के माध्यम से उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 36,300 ब्रिटिश पाउंड तक की शिक्षण शुल्क सहायता, स्वास्थ्य बीमा, अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा तथा वार्षिक रखरखाव भत्ता सहित निर्धारित सुविधाएं शामिल हैं। शिक्षण शुल्क की यह राशि भारतीय मुद्रा में लगभग 45 लाख रुपये के बराबर है।
आदित्य ने शासकीय वी. वाई. टी. पी. जी. स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग से विज्ञान स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। स्नातक स्तर पर उन्होंने रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी विज्ञान का अध्ययन किया। जीवन विज्ञान एवं विज्ञान विषयों के अध्ययन से विकसित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और विश्लेषणात्मक क्षमता को अब वे व्यवसाय नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहते हैं।


आदित्य की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण भी महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता दुर्ग शहर में स्ट्रीट फूड का छोटा व्यवसाय संचालित करते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने आदित्य की शिक्षा को प्राथमिकता दी और उनके सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर सहयोग किया। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर हासिल करना आदित्य की मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और संकल्प के मार्ग में स्थायी बाधा नहीं बनती।
आदित्य ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और महाविद्यालय के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने विशेष रूप से वनस्पति विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ. विजय लक्ष्मी नायडू, डॉ. श्रीराम कुंजाम तथा चयन प्रक्रिया के दौरान निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने के लिए डॉ. मोतीराम साहू के प्रति आभार व्यक्त किया। आदित्य ने कहा कि चयन प्रक्रिया की तैयारी से लेकर आवश्यक मार्गदर्शन तक शिक्षकों का सहयोग उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा प्रदान की गई शिक्षा, प्रोत्साहन और विश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे अपने महाविद्यालय और शिक्षकों से प्राप्त मूल्यों, संस्कारों और शिक्षा को सदैव अपने साथ रखेंगे तथा अपने शहर और महाविद्यालय का नाम वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित करने का प्रयास करेंगे।
आदित्य की इस उपलब्धि पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. अभिनेष सुराना, डॉ. जी. एस. ठाकुर डॉ. राकेश तिवारी तथा डॉ. सतीश कुमार सेन ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आदित्य की सफलता को महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आदित्य की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह सीमित संसाधनों वाले विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत, उचित मार्गदर्शन और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग किसी भी साधारण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकता है।

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