
कृषि अधिकारी बनकर गांवों में करते थे रेकी, जूता कारोबारी निकला मास्टरमाइंड; चोरी की रकम से खरीदी क्रेटा कार और बुलेट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में चोरी की वारदातों का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्कूल में प्रिंसिपल रह चुका एक व्यक्ति और उसके साथियों ने मिलकर चोरी का गिरोह बनाया था। आरोपी कृषि अधिकारी बनकर ग्रामीण इलाकों में घूमते और सर्वे के नाम पर सूने मकानों की रेकी करते थे। मौका मिलते ही मकानों के ताले तोड़कर सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी कर फरार हो जाते थे।
कोटा थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बिलासपुर जिले में नौ और कोरबा जिले में एक सहित कुल 10 चोरी की वारदातों का खुलासा किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने-चांदी के आभूषण, 1.30 लाख रुपये नकद, चोरी की रकम से खरीदी गई क्रेटा कार और बुलेट सहित करीब 20 लाख रुपये का सामान बरामद किया गया है।
जूते की दुकान की आड़ में चला रहा था गिरोह
पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड विनोद कुमार वासुदेव (33) है। वह स्नातक है और सामान्य कारोबारी की तरह दिखने के लिए उसने जूते की दुकान खोल रखी थी। इसी की आड़ में वह चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले गिरोह का संचालन करता था।
गिरोह में भूपेंद्र सिंह राठौर उर्फ गुरुजी (43) भी शामिल था, जो पहले एक स्कूल में प्रिंसिपल रह चुका है। वह स्नातकोत्तर शिक्षित है। नौकरी से निकाले जाने के बाद उसके चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात सामने आई है। तीसरा आरोपी राज प्रजापति उर्फ लल्लू (19) है। तीनों आरोपी कोरबा जिले के मानिकपुर क्षेत्र स्थित डिपरापारा के रहने वाले हैं।
कृषि अधिकारी बनकर करते थे सूने मकानों की तलाश
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह के मुताबिक, आरोपियों ने ग्रामीणों को शक से बचने के लिए सामान्य लोगों की तरह गांवों में घूमने का तरीका अपनाया था। वे कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने की बात कहते और इस दौरान ऐसे मकानों पर नजर रखते थे, जहां ताला लगा होता था।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी के कारण लोगों के घरों से बाहर रहने का फायदा उठाकर आरोपी दिनदहाड़े चोरी करते थे। वे ताला तोड़कर घर में घुसते और पेटी-अलमारी में रखे जेवर तथा नकदी समेटकर कुछ ही मिनटों में फरार हो जाते थे।
सीसीटीवी से बचने के लिए ढकते थे चेहरा
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए हेलमेट पहनते और चेहरे को ढककर वारदात को अंजाम देते थे। ग्रामीण इलाकों में बाइक से घूमकर सूने मकानों की पहचान करना उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा था।
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की। इसके बाद कोटा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने चोरी की वारदातों में शामिल होना स्वीकार किया।
चोरी के पैसों से खरीदी क्रेटा कार और बुलेट
जांच में चोरी की रकम से वाहन खरीदने की बात भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मास्टरमाइंड विनोद ने चोरी के पैसों से क्रेटा कार खरीदी थी और उसकी किस्तों का भुगतान भी इसी रकम से करने की बात सामने आई है। वहीं, राज प्रजापति ने चोरी की रकम से अपने चाचा के नाम पर बुलेट मोटरसाइकिल खरीदी थी।
पुलिस ने आरोपियों के पास से सोने-चांदी के आभूषण, 1.30 लाख रुपये नकद, गुल्लक में रखे 1,250 रुपये के सिक्के, क्रेटा कार, बुलेट और एक बाइक बरामद की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।
बिलासपुर और कोरबा के 10 मामलों का खुलासा
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की संलिप्तता बिलासपुर जिले के कोटा, रतनपुर, बिल्हा, पचपेड़ी और बेलगहना चौकी सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हुई चोरी की घटनाओं में सामने आई है। इसके अलावा कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र में दर्ज चोरी का एक मामला भी सुलझाया गया है।
इस तरह पुलिस ने कुल 10 चोरी के मामलों का खुलासा किया है, जिनमें नौ मामले बिलासपुर जिले और एक मामला कोरबा जिले का है।
पहले भी दर्ज हैं चोरी के 19 मामले
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह ने बताया कि तीनों आरोपी पहले भी जांजगीर जिले में दिनदहाड़े चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच में वर्ष 2022-23 के दौरान दर्ज चोरी से संबंधित 19 प्रकरणों की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी का सामान बरामद किया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
