
किचन में मिले बाल, रेलिंग पर फिंगरप्रिंट और कपड़ों पर खून के धब्बों से आरोपियों तक पहुंची जांच; कुलदीप साहू ने पुलिस पर झूठे केस में फंसाने का लगाया था आरोप
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में पुलिसकर्मी की पत्नी और बेटी की हत्या व दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अहम साबित हुए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 51 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की। प्रत्यक्षदर्शी के अभाव में घटनास्थल से मिले बाल, खून के नमूने, फिंगरप्रिंट और डिजिटल साक्ष्यों ने जांच को महत्वपूर्ण आधार दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू की ओर से पुलिस पर झूठे मामले में फंसाने के लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
किचन में मिले बाल और रेलिंग के निशान बने अहम सबूत
मामले में पेश चार्जशीट के मुताबिक, जांच के दौरान घटनास्थल की किचन से इंसानी बाल बरामद किए गए थे। डीएनए जांच में इन नमूनों का आरोपियों के नमूनों से मिलान होने की बात सामने आई। इसके अलावा मृतका के कपड़ों और घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की डीएनए प्रोफाइलिंग भी जांच का हिस्सा रही।
पुलिसकर्मी के घर की सीढ़ियों की रेलिंग से मिले फिंगरप्रिंट की जांच में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों के अनुसार, ये निशान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू से मेल खाते थे। पुलिस ने कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की भूमिका अदालत के सामने रखी।
कुलदीप ने पुलिस पर लगाया था सैंपल लेकर फंसाने का आरोप
सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने दावा किया कि घटना के दिन उसे हिरासत में रखकर उसके खून, स्पर्म, उंगलियों और हथेली के निशान तथा बालों के नमूने लिए गए थे। उसने आरोप लगाया कि इन नमूनों के जरिए उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की गई।
वहीं, फूल सिंह उर्फ रिंकू ने दुर्गा विसर्जन के दौरान अपनी मौजूदगी साबित करने के लिए फोटो और वीडियो का हवाला दिया। आरोपी चंद्रकांत ने भी कपड़े घटनास्थल पर रखे जाने का दावा किया। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
जिलाबदर होने के बावजूद शहर में घूम रहा था आरोपी
चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी कुलदीप साहू जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से जिलाबदर था, लेकिन इसके बावजूद वह शहर में घूम रहा था। वारदात वाली रात चेकिंग कर रही पुलिस टीम पर खौलता तेल फेंकने और भागते समय फायरिंग करने का भी आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद पुलिसकर्मी से पुरानी रंजिश के चलते कुलदीप अपने साथियों के साथ उसके घर पहुंचा और वारदात को अंजाम दिया। मामले में अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका से संबंधित साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए।
छह आरोपियों में से चार के खिलाफ आरोप साबित
इस मामले में कुल छह आरोपी थे। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 51 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, चार आरोपियों के खिलाफ डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। वहीं, सूरज साहू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया। छठे आरोपी के संबंध में अंतिम फैसले की स्थिति उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
मामले में दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। हालांकि, मृत्युदंड पर अमल से पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं तीन आरोपी
मां-बेटी हत्याकांड के मामले में दोषी ठहराए गए तीन आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें अलग-अलग बैरक में रखा गया है। फांसी की सजा की पुष्टि से संबंधित दस्तावेज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर भेजे गए हैं।
इस मामले की सुनवाई में प्रत्यक्षदर्शी गवाह का अभाव होने के बावजूद डीएनए जांच, फिंगरप्रिंट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयानों ने अहम भूमिका निभाई। वैज्ञानिक जांच से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपियों की भूमिका का आकलन करते हुए फैसला सुनाया।

