
बतौली (सरगुजा), 23अप्रैल 2026 — छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली थाना क्षेत्र में गौ तस्करी का एक और मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्कर एक बोलेरो वाहन में 5 गौवंश को अमानवीय तरीके से भरकर ले जा रहे थे, लेकिन वाहन खराब होने पर उन्हें सड़क किनारे छोड़कर मौके से फरार हो गए।
वाहन खराब होने से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर देवरी के पास ग्रामीणों को एक संदिग्ध बोलेरो वाहन खड़ा मिला। जब लोगों ने पास जाकर देखा तो उसमें 3 बैल, 1 गर्भवती गाय और एक बछड़ा ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे। पशुओं की हालत बेहद खराब थी और वे चलने तक की स्थिति में नहीं थे।
ग्रामीणों के पहुंचते ही आरोपी मौके से फरार हो गए।
बजरंग दल और ग्रामीणों ने कराया मुक्त
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और गौवंश को वाहन से बाहर निकालकर मुक्त कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पशुओं के साथ अत्यधिक क्रूरता की गई थी, जिससे उनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई थी।
पशु चिकित्सकों ने किया इलाज
सूचना मिलने पर पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
पशु चिकित्सा अधिकारी एवं डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।
- दो पशुओं को ग्लूकोज (बोतल) चढ़ाया गया
- सभी पशुओं को निगरानी में रखा गया है
- स्वस्थ होने तक उपचार जारी रहेगा
ग्राम वेलकोट के सरपंच द्वारा पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी ली गई, जिसकी ग्रामीणों ने सराहना की।
लगातार मिल रहे तस्करी के मामले
बतौली क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी
- 2 पिकअप वाहन
- 1 स्कॉर्पियो
- और अब 1 बोलेरो
ऐसे वाहन मिले हैं, जिनमें पशुओं को भरकर तस्करी की जा रही थी। अधिकतर मामलों में वाहन खराब होने या दुर्घटना के बाद ही घटनाओं का खुलासा हुआ है।
पुलिस पर उठे सवाल
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि:
- रोजाना पशुओं से भरे वाहन सरगुजा से झारखंड की ओर जा रहे हैं
- बावजूद इसके पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही
- अब तक पकड़े गए वाहनों के मालिकों और तस्करों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई
ग्रामीणों ने इसे पुलिस की लापरवाही बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन के लिए चुनौती
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि क्षेत्र में संगठित रूप से गौ तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है कि वे इस अवैध गतिविधि पर प्रभावी रोक लगाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
