
रायपुर | 23 अप्रैल 2026
राजधानी रायपुर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल द्वारा वसूले जा रहे पार्किंग शुल्क को अवैध घोषित कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि पार्किंग सुविधा एक बुनियादी सुविधा है और इसे व्यवसायिक कमाई का साधन नहीं बनाया जा सकता।
⚖️ आयोग का ऐतिहासिक निर्णय
जिला उपभोक्ता आयोग की अतिरिक्त बेंच (अध्यक्ष प्रशांत कुण्डू व सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस) ने अपने फैसले में कहा कि मॉल प्रबंधन अब किसी भी वाहन—दोपहिया या चारपहिया—से पार्किंग शुल्क नहीं वसूल सकेगा।
यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य में अन्य मॉल्स के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
🧾 कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
- 15 जून 2025 को अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला अपनी बुजुर्ग माता को मॉल छोड़ने पहुंचे।
- कुछ ही मिनट रुकने के बावजूद उनसे ₹30 पार्किंग शुल्क वसूला गया।
- आपत्ति जताने पर मॉल प्रबंधन ने “नो फ्री पिकअप-ड्रॉप” नीति का हवाला दिया।
- इसके बाद अधिवक्ता ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
📚 अदालत में क्या दलीलें दी गईं?
- पार्किंग क्षेत्र भवन अनुमति के दौरान जनता की सुविधा के लिए स्वीकृत होता है।
- इस पर शुल्क लेना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
- देश के विभिन्न उपभोक्ता मंचों व उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला भी दिया गया।
आयोग ने इन सभी तर्कों को स्वीकार करते हुए पार्किंग शुल्क को अवैध करार दिया।
📢 आयोग का स्पष्ट आदेश
- मॉल में पार्किंग पूरी तरह निशुल्क होगी
- किसी भी उपभोक्ता से शुल्क नहीं लिया जाएगा
- आदेश का उल्लंघन होने पर कार्रवाई संभव
👥 उपभोक्ताओं को क्या फायदा?
अब मॉल में शॉपिंग, मूवी या खाने-पीने के लिए आने वाले लोगों को अतिरिक्त पार्किंग शुल्क नहीं देना पड़ेगा। यह फैसला सीधे तौर पर आम नागरिकों को राहत देने वाला है।
❗ अगर फिर भी वसूला जाए शुल्क तो क्या करें?
आयोग ने कहा है कि:
- उपभोक्ता सीधे उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कर सकते हैं
- ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी
यह फैसला न सिर्फ रायपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहां उपभोक्ता अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। मॉल्स द्वारा पार्किंग शुल्क वसूली पर यह निर्णय भविष्य में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

