मनोरंजन डेस्क | 8 जून 2026
निर्देशक David Dhawan की नई कॉमेडी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai दर्शकों और समीक्षकों की उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आ रही है। फिल्म समीक्षक समय ताम्रकर ने अपनी समीक्षा में इसे डेविड धवन के करियर की सबसे कमजोर फिल्मों में से एक बताते हुए महज 1/5 रेटिंग दी है।
फिल्म की कहानी जस और बानी के वैवाहिक जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी अभी मां बनने के लिए तैयार नहीं है। दोनों के बीच बढ़ते मतभेद उन्हें अलगाव की स्थिति तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद कहानी लंदन पहुंचती है, जहां जस की मुलाकात प्रीत से होती है और घटनाक्रम प्रेम, झूठ, भ्रम तथा रिश्तों की उलझनों में बदल जाता है।
समीक्षा के अनुसार फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी पटकथा है। कहानी कई जगह अविश्वसनीय और कमजोर लगती है। पात्रों के निर्णय और व्यवहार दर्शकों को स्वाभाविक नहीं लगते, जिससे फिल्म भावनात्मक रूप से जुड़ाव पैदा करने में असफल रहती है।
कॉमेडी के मोर्चे पर भी फिल्म निराश करती है। अधिकांश हास्य दृश्य लंबे और प्रभावहीन बताए गए हैं। समीक्षक के अनुसार फिल्म में ऐसे कई दृश्य हैं जो मनोरंजन के बजाय दर्शकों में झुंझलाहट पैदा करते हैं। लेखक युनूस सेजवाल और संवाद लेखक फरहाद सामजी का लेखन भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
निर्देशन को लेकर भी डेविड धवन की आलोचना की गई है। समीक्षा में कहा गया है कि निर्देशक अपनी पुरानी सफल फिल्मों के फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश करते नजर आते हैं, लेकिन वह जादू इस बार गायब है जिसने कभी उनकी फिल्मों को लोकप्रिय बनाया था।
अभिनय की बात करें तो Varun Dhawan ने अपनी कॉमिक टाइमिंग से कुछ दृश्यों को संभालने की कोशिश की है, हालांकि कमजोर पटकथा उनके प्रदर्शन को सीमित कर देती है। Pooja Hegde अपनी ग्लैमरस मौजूदगी से प्रभावित करती हैं, जबकि Mrunal Thakur का अभिनय कई स्थानों पर जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होता है।
सहायक कलाकारों में Chunky Pandey, Jimmy Shergill, Mouni Roy, Rajpal Yadav और Johnny Lever जैसे अनुभवी कलाकारों को भी पटकथा पर्याप्त अवसर नहीं दे पाती।
फिल्म का संगीत भी कोई खास प्रभाव छोड़ने में असफल रहा है। हालांकि सिनेमैटोग्राफी को फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष माना गया है। खूबसूरत विदेशी लोकेशनों को आकर्षक ढंग से फिल्माया गया है, जो दर्शकों का ध्यान खींचती हैं।
कुल मिलाकर, ‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक ऐसी कॉमेडी फिल्म साबित होती है जो अपने मूल उद्देश्य—दर्शकों का मनोरंजन करने—में असफल नजर आती है। बड़े सितारों, भव्य लोकेशनों और रंगीन प्रस्तुति के बावजूद फिल्म न तो पर्याप्त हास्य पैदा कर पाती है और न ही कोई यादगार सिनेमाई अनुभव दे पाती है।



