सिस्टम से हारे ग्रामीण: प्रशासनिक देरी से नाराज किसानों ने खुद संभाला पुल निर्माण का जिम्मा

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धमतरी। विकास कार्यों की घोषणाएं और प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलने के बावजूद कई बार योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पातीं। ऐसा ही मामला धमतरी जिले के नगर पंचायत नगरी क्षेत्र की पुरानी बस्ती में सामने आया है, जहां महानदी पर प्रस्तावित पुल का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। निर्माण कार्य में हो रही देरी से परेशान ग्रामीणों और किसानों ने अब स्वयं आगे बढ़कर वैकल्पिक पुल बनाने का कार्य शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, पुरानी बस्ती क्षेत्र में महानदी पर पुल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य प्रारंभ नहीं किए जाने से स्थानीय किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को नदी के दोनों ओर स्थित अपने खेतों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। खाद, बीज और कृषि उपकरणों के परिवहन में भी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने शुरू किया श्रमदान

सरकारी कार्यवाही का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने स्वयं समस्या का समाधान निकालने का निर्णय लिया। किसानों और ग्रामीणों ने आपसी सहयोग एवं श्रमदान के माध्यम से नदी पर वैकल्पिक पुल तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। इस कार्य में पन्नालाल साहू, हीरालाल साहू, मन्नू साहू, छोटेलाल साहू, पवन किरण साहू सहित कई ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

आश्वासनों के बावजूद नहीं शुरू हुआ निर्माण

ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और नगर पंचायत की ओर से कई बार पुल निर्माण का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। लोगों का सवाल है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो आखिर निर्माण कार्य में देरी क्यों हो रही है।

आत्मनिर्भरता की बनी मिसाल

ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास आत्मनिर्भरता और जनसहभागिता का उदाहरण बनकर सामने आया है। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है। स्थायी राहत तभी मिलेगी जब प्रशासन शीघ्र पुल निर्माण कार्य शुरू कर किसानों और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराएगा।

फिलहाल, प्रशासनिक सुस्ती के बीच ग्रामीणों की पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और यह सवाल भी खड़ा कर रही है कि स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है।

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