शिक्षक हैं बाबू! कोई तहसील में, कोई कलेक्टर ऑफिस तो कोई लोक अभियोजन कार्यालय में… डीपीआई की सख्ती के बाद 51 शिक्षकों की स्कूल वापसी, लिस्ट देख रह जायेंगे हैरान

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अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर मूल स्कूलों में लौटाने की मुहिम अब धरातल पर उतरती दिख रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के निर्देश के बाद सरगुजा जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने 51 शिक्षकों को विभिन्न कार्यालयों से कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजने का आदेश जारी किया है। जारी सूची यह बताने के लिए काफी है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पढ़ाने के बजाय दूसरे विभागों और सरकारी कार्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे थे। डीपीआई ने हाल ही में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिक्षा विभाग के शिक्षक और कर्मचारी, जो विभिन्न कार्यालयों में संलग्न हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए। इसी के अनुपालन में अंबिकापुर जिला शिक्षा अधिकारी ने यह आदेश जारी किया है।

कहां-कहां अटैच थे शिक्षक?

रिलीविंग आदेश में शामिल शिक्षकों की तैनाती जिन कार्यालयों में थी, उनमें कई ऐसे विभाग हैं जिनका शिक्षा से कोई सीधा संबंध नहीं है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • कलेक्टर कार्यालय
  • तहसील कार्यालय (अंबिकापुर, सीतापुर, लखनपुर, मैनपाट सहित कई तहसीलें)
  • अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय
  • जनपद पंचायत कार्यालय
  • जिला पंचायत
  • कार्यालय संभागायुक्त
  • लोक अभियोजन (एडीपीओ) कार्यालय
  • जिला निर्वाचन कार्यालय
  • जिला सामान्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय
  • आदिवासी विकास परियोजना कार्यालय
  • सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय
  • मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत
  • आरटीओ कार्यालय
  • विद्युत यांत्रिकी शाखा
  • एसडीएम कार्यालय
  • छात्रावास कार्यालय
  • वीडियोग्राफी/कंट्रोल कक्ष जैसे प्रशासनिक कार्यों वाले कार्यालय जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

पढ़ाने के बजाय दूसरे विभागों में निभा रहे थे जिम्मेदारी

सूची में सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता और अन्य शैक्षणिक पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से कई शिक्षक कलेक्टोरेट, तहसील, राजस्व, पंचायत, निर्वाचन और अभियोजन कार्यालयों में कार्यरत थे, जबकि उनकी मूल पदस्थापना सरकारी स्कूलों में थी।

डीपीआई की सख्ती का असर

शिक्षा विभाग लंबे समय से इस आलोचना का सामना कर रहा था कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक विभिन्न विभागों में संलग्न होकर गैर-शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। डीपीआई के हालिया निर्देश के बाद अब ऐसे शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में वापस भेजा जा रहा है।अंबिकापुर से जारी यह आदेश इस अभियान की पहली बड़ी तस्वीर सामने लाता है। यदि प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की समीक्षा हुई तो ऐसे कई और शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में लौट सकते हैं। शिक्षा विभाग के इस कदम से एक ओर जहां स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर वर्षों तक शिक्षकों से शिक्षा के बजाय दूसरे विभागों में काम क्यों लिया जाता रहा।

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