आवेश में की गई पत्नी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने दी राहत, उम्रकैद घटाकर 10 साल की सजा

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धारा 302 को 304 भाग-1 में किया परिवर्तित, गुस्से में किए गए अपराध को माना गैर-इरादतन हत्या

बिलासपुर, 23 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या करने वाले एक आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को संशोधित कर 10 वर्ष के सश्रम कारावास में बदल दिया है। अदालत ने माना कि आरोपी ने यह अपराध पूर्व नियोजित तरीके से नहीं, बल्कि आवेश और गुस्से में आकर किया था।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दी गई सजा को बदलकर धारा 304 भाग-1 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास में परिवर्तित कर दिया।

जशपुर जिले का है मामला

प्रकरण जशपुर जिले के ग्राम बेने चटकपुर का है। जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता पहरु राम की पत्नी तारामुनी बाई 2 जून 2022 को बिना बताए घर से कहीं चली गई थी। चार दिन बाद जब वह वापस लौटी तो पति ने उससे इस बारे में पूछताछ की, लेकिन पत्नी ने कोई जवाब नहीं दिया।

बताया गया कि इसी बात से नाराज होकर पहरु राम ने लकड़ी के डंडे से पत्नी पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण तारामुनी बाई की मौके पर ही मौत हो गई।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद

मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने पहरु राम को हत्या का दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

बेटी की गवाही बनी अहम आधार

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतका और आरोपी की बेटी की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और घटना की परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपी का हत्या करने का पूर्व इरादा नहीं था। घटना अचानक उत्पन्न हुए गुस्से और आवेश का परिणाम थी।

सजा में संशोधन

खंडपीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए इसे हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा जाना उचित है। इसी आधार पर अदालत ने धारा 302 के तहत दी गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए धारा 304 भाग-1 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

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