
500 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा था असर, ओपन स्कूल की परीक्षाओं में स्टाफ की ड्यूटी से नियमित कक्षाएं प्रभावित होने का आरोप; प्रदर्शन के बाद शिक्षक और नए प्राचार्य की व्यवस्था
दुर्ग। जिले के पेंड्रावन स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों द्वारा किया गया चक्काजाम अचानक लिया गया फैसला नहीं था। विद्यार्थियों का कहना है कि वे पिछले तीन से चार वर्षों से शिक्षकों की कमी और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे थे। कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लगने और शिक्षकों की अनुपलब्धता से परेशान होकर छात्रों ने 21 अगस्त को पहली बार धमधा-खैरागढ़ मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन किया।
मांगों पर अपेक्षित समाधान नहीं होने के बाद 25 अगस्त को विद्यार्थियों ने दोबारा सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया। इस बार आंदोलन करीब 12 घंटे तक चला और रात लगभग 12 बजे समाप्त हुआ। आंदोलन के दौरान यह आरोप सामने आया कि छात्रों को शिक्षकों ने प्रदर्शन के लिए उकसाया है। हालांकि, आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों ने इस आरोप से साफ इनकार किया।
छात्रों ने कहा- अपनी समस्या को लेकर खुद किया आंदोलन
छात्रों के मुताबिक स्कूल में लंबे समय से पर्याप्त शिक्षक नहीं थे। कई बार विषयवार कक्षाएं प्रभावित होती थीं और शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई में परेशानी होती थी। छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याएं स्कूल प्रबंधन और संबंधित स्तर पर रखने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिलने पर स्वयं आंदोलन का निर्णय लिया।
11वीं के छात्र हिमांशु कुमार साहू ने बताया कि फिलहाल स्कूल की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन अभी भी कुछ पद रिक्त हैं। इन पदों को जल्द भरना जरूरी है। वहीं 12वीं के छात्र संकेत रात्रे का कहना है कि नए शिक्षक आने से पढ़ाई की व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति होने से विद्यार्थियों को और राहत मिलेगी।
एक ही परिसर में स्कूल, ओपन स्कूल और कॉलेज
पेंड्रावन में एक ही परिसर में अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की बात भी सामने आई है। परिसर में प्राथमिक, मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूल के साथ ओपन स्कूल का सेंटर और कॉलेज भी संचालित होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2021 में शुरू हुआ कॉलेज अब तक अपने भवन में संचालित नहीं हो पाया है। इसके कारण कॉलेज की गतिविधियां भी इसी परिसर में चलती रही हैं। अलग-अलग कक्षाओं, परीक्षाओं और संस्थानों की गतिविधियों के कारण स्कूल की नियमित व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
शिक्षकों की कमी बनी मुख्य वजह
स्थानीय जानकारी के मुताबिक स्कूल में सभी विषयों को मिलाकर 17 शिक्षकों का सेटअप था, लेकिन स्वामी आत्मानंद स्कूल शुरू होने के बाद शिक्षकों की संख्या में कमी आती गई। विद्यार्थियों और ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई थी।
पेंड्रावन के सरपंच प्रतिनिधि शशिकांत सिन्हा के अनुसार स्कूल की समस्याओं की जानकारी पहले भी प्राचार्य, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। उनके मुताबिक आंदोलन के बाद अब शिक्षक और नए प्राचार्य की व्यवस्था हुई है, जिससे स्कूल की स्थिति धीरे-धीरे सुधरने की उम्मीद है।
ओपन स्कूल की परीक्षाओं से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप
छात्रों और कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में संचालित ओपन स्कूल की परीक्षाओं के दौरान नियमित स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती थी।
उनका कहना है कि ओपन स्कूल की परीक्षाओं के दौरान नियमित कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता था। कुछ विद्यार्थियों ने यह भी दावा किया कि कई अवसरों पर कक्षाओं में उपस्थिति दर्ज कराने और नियमित पढ़ाई को लेकर परेशानी आती थी।
हालांकि, इन आरोपों पर पूर्व प्राचार्य चंदेल ने सफाई देते हुए कहा कि ओपन स्कूल का प्रभार उनके पास नहीं था। उनके अनुसार इसके लिए अलग प्रभारी शिक्षक नियुक्त था और वे अपने नियमित स्कूल संबंधी दायित्वों के अनुसार ही कार्य करते थे।
ओपन स्कूल सेंटर में साल में कई परीक्षाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार पेंड्रावन स्थित ओपन स्कूल सेंटर में वर्ष के दौरान कई परीक्षाएं आयोजित होती थीं और बड़ी संख्या में परीक्षार्थी यहां पहुंचते थे। दूसरे क्षेत्रों से भी परीक्षार्थियों के आने की बात कही गई है।
हालांकि, परीक्षा केंद्र को लेकर स्थानीय स्तर पर किए जा रहे कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
तत्कालीन प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी
छात्रों से बातचीत में तत्कालीन प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी सामने आई। विद्यार्थियों का आरोप है कि अपनी समस्याएं लेकर प्राचार्य के पास जाने पर उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता था। छात्रों का यह भी कहना है कि ओपन स्कूल की गतिविधियों और शिक्षकों की ड्यूटी के कारण नियमित पढ़ाई प्रभावित होती थी।
हालांकि, पूर्व प्राचार्य ने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करना उनके स्वभाव में नहीं है और उन्हें यह समझ नहीं आया कि विद्यार्थी उनसे नाराज क्यों हुए।
शाम के बाद बाहरी लोगों की मौजूदगी का दावा
सरपंच प्रतिनिधि शशिकांत सिन्हा ने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती दौर में स्थिति सामान्य थी, लेकिन शाम के समय कुछ बाहरी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोग प्रदर्शन स्थल पर सक्रिय हुए। उनके अनुसार कुछ समय पर मांगों को लेकर समाधान की स्थिति बनने के बावजूद बाहरी लोगों की मौजूदगी से आंदोलन लंबा खिंचा।
हालांकि, इस दावे के बावजूद छात्रों और ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन की मूल वजह स्कूल की समस्याएं और शिक्षकों की कमी थी। विद्यार्थियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें किसी शिक्षक या ग्रामीण ने प्रदर्शन के लिए नहीं उकसाया था।
मंत्री के पहुंचने के बाद बदली तस्वीर
प्रदर्शन के दो दिन बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव स्वयं पेंड्रावन पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों से मुलाकात कर स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ उन्होंने सेल्फी भी ली। इसके बाद विद्यार्थियों ने वीडियो के माध्यम से मंत्री का धन्यवाद किया।
आंदोलन के बाद स्कूल में शिक्षकों और नए प्राचार्य की व्यवस्था किए जाने से विद्यार्थियों को राहत मिली है। हालांकि, छात्रों की मांग है कि जो पद अब भी खाली हैं, उन्हें जल्द भरा जाए ताकि भविष्य में पढ़ाई दोबारा प्रभावित न हो।
निष्कर्ष
पेंड्रावन स्कूल का आंदोलन केवल एक दिन की नाराजगी का परिणाम नहीं दिखता। छात्रों और ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई थी। इसके साथ ही एक ही परिसर में स्कूल, ओपन स्कूल और कॉलेज की गतिविधियों के संचालन तथा परीक्षा ड्यूटी को लेकर भी सवाल उठे। दूसरी ओर, पूर्व प्राचार्य ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है।
फिलहाल आंदोलन के बाद स्कूल की व्यवस्था में सुधार की शुरुआत हुई है, लेकिन विद्यार्थियों की सबसे बड़ी मांग अब भी यही है कि सभी रिक्त शिक्षक पद जल्द भरे जाएं और नियमित कक्षाओं की व्यवस्था लगातार बनी रहे।


