‘सूर्यवंश’ से मिलता-जुलता नाम रखकर बेच रहे थे बेसन, दो लोगों पर FIR दर्ज

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पैकेट की डिजाइन, सूर्य चिह्न और टैगलाइन की नकल करने का आरोप; माना कैंप पुलिस ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में शुरू की जांच

रायपुर। राजधानी रायपुर में मिलते-जुलते ब्रांड नाम और पैकेजिंग के जरिए बेसन बेचने का मामला सामने आया है। ‘सूर्यवंश’ ब्रांड की नकल कर ‘सूर्यवंशी’ नाम से बेसन बेचने के आरोप में माना कैंप पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उत्पाद के नाम से लेकर पैकेट की डिजाइन, सूर्य के चिह्न और टैगलाइन तक में समानता रखी गई है, जिससे ग्राहकों के भ्रमित होने की आशंका है।

2004 से पंजीकृत होने का दावा

शिकायतकर्ता मनीष शादीजा रामसागरपारा स्थित मनीष आटा चक्की के माध्यम से आटा, बेसन और फरसान से संबंधित उत्पादों का कारोबार करते हैं। उनका दावा है कि ‘सूर्यवंश’ ट्रेडमार्क वर्ष 2004 से पंजीकृत है और इसकी वैधता 21 जुलाई 2034 तक है। शिकायत के मुताबिक, लंबे समय से बाजार में मौजूद इस ब्रांड ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

पैकेट की डिजाइन और टैगलाइन की नकल का आरोप

मनीष शादीजा ने आरोप लगाया है कि मेसर्स एमएस सिंध बेसन के संचालक धीरज सचदेव और उनके परिजनों ने ‘सूर्यवंशी’ नाम से बेसन बेचना शुरू किया। शिकायत में कहा गया है कि पैकेट का रंग, सूर्य का चिह्न, उत्पाद की तस्वीर और ‘शहर गृहणियों की पहली पसंद’ जैसी टैगलाइन भी मिलती-जुलती रखी गई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, नाम और पैकेजिंग में समानता होने के कारण ग्राहक दोनों ब्रांड के उत्पादों को लेकर भ्रमित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे उनके कारोबार और ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

माना कैंप और तेलीबांधा में उत्पादन का आरोप

शिकायत में बेसन के उत्पादन और भंडारण से संबंधित स्थानों के रूप में माना कैंप स्थित डी-62, जय सदाराम मार्केट और तेलीबांधा क्षेत्र के रविग्राम का उल्लेख किया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 10 अक्टूबर को ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आरोपियों के नाम को लेकर भी अंतर

मामले की प्राथमिकी में धीरज सचदेव और श्रीचंद सचदेव के नाम दर्ज हैं, जबकि शिकायत के विस्तृत विवरण में निर्मल सचदेव का भी उल्लेख किया गया है। आरोपों की सत्यता और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच पुलिस कर रही है। फिलहाल, ब्रांड की नकल और ट्रेडमार्क उल्लंघन से संबंधित आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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