
दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में RUSA 2.0 के अंतर्गत समाजशास्त्र विभाग द्वारा विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं शोध संबंधी ज्ञान को बढ़ाने के उद्देश्य से अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक विचारकों के सिद्धांतों के साथ शोध उपकरण, तकनीक और प्रोजेक्ट कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को जानकारी दी।
कॉम्टे और दुर्खीम के समाजशास्त्रीय विचारों पर व्याख्यान
कार्यक्रम में श्रीमती ललिता साहू एवं डॉ. तरुण पद्मनवर वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। श्रीमती ललिता साहू ने ऑगस्ट कॉम्टे के प्रत्यक्षवाद तथा तीन अवस्थाओं के नियम के साथ एमिल दुर्खीम के सामाजिक तथ्य, श्रम विभाजन, सामाजिक एकता एवं सामूहिक चेतना जैसे प्रमुख समाजशास्त्रीय विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि कॉम्टे ने समाज के वैज्ञानिक अध्ययन को महत्व दिया, जबकि दुर्खीम ने सामाजिक घटनाओं के वस्तुनिष्ठ अध्ययन और सामाजिक एकता की भूमिका को प्रमुखता दी। विद्यार्थियों को दोनों विचारकों के सिद्धांतों को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़कर समझाया गया।
डॉ. तरुण पद्मनवर ने कार्ल मार्क्स के सिद्धांत एवं उनके विचारों पर चर्चा की। इसके साथ ही नव-मार्क्सवादी चिंतक लुई अल्थुसेर के विचारों से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
शोध उपकरण और तकनीकों की दी गई जानकारी
सितंबर 2026 में आयोजित अतिथि व्याख्यान के दूसरे शैक्षणिक सत्र में प्रोफेसर सुचित्रा शर्मा, विजिटिंग प्रोफेसर, भारती विश्वविद्यालय तथा डॉ. अमरनाथ शर्मा, सहायक प्राध्यापक, बोरी कॉलेज, दुर्ग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. एलिजाबेथ भगत सहित विभाग के सभी प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
प्रथम सत्र में डॉ. अमरनाथ शर्मा ने “Research Tools and Techniques (शोध उपकरण एवं तकनीक)” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों एवं तकनीकों, उनके उचित प्रयोग तथा शोध कार्य में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शोधकर्ता की भूमिका और प्रोजेक्ट कार्य पर मार्गदर्शन
द्वितीय सत्र में प्रोफेसर सुचित्रा शर्मा ने “शोधकर्ता एवं प्रोजेक्ट” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने शोध प्रक्रिया, शोधकर्ता की भूमिका तथा प्रोजेक्ट कार्य को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से तैयार करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध के प्रति रुचि विकसित करने तथा विषय का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। अतिथि व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को समाजशास्त्रीय चिंतन के साथ शोध कार्य की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। साथ ही उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्हें उपयोगी मार्गदर्शन मिला।

