
रायपुर, 12 सितंबर 2026। मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन तकनीक का अत्यधिक इस्तेमाल अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। राज्यपाल रमेन डेका ने विद्यार्थियों को डिजिटल एडिक्शन के प्रति आगाह करते हुए कहा कि आज डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य एडिक्शन से ज्यादा खतरनाक हो गया है। तकनीक जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल उतना ही होना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक है।
राज्यपाल शनिवार को आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करने के साथ ही उसके दुष्प्रभावों से बचने की सलाह दी।
चाक-पेंसिल से इंटरनेट युग तक बदली शिक्षा
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने अपने समय और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के बीच आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट के युग में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि उनके समय में चाक, पेंसिल, किताबों और गुरु के माध्यम से ज्ञान हासिल किया जाता था।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की जरूरत है, लेकिन इसका उपयोग भी मानव हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। तकनीक सुविधा का माध्यम है, इसलिए उसके अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
AI जरूरी, लेकिन मानव हित सर्वोपरि
राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भविष्य की जरूरत है, लेकिन तकनीक कभी भी इंसान से बड़ी नहीं हो सकती। विज्ञान, तकनीक और नवाचार का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना और समाज के हित में योगदान देना होना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से बदलती तकनीक के साथ आगे बढ़ने के साथ-साथ उसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को समझने का भी आह्वान किया।
न्यूक्लियर एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और माइक्रोप्लास्टिक बड़ी चुनौती
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि 21वीं सदी में विकास के साथ उसके प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा। न्यूक्लियर एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और माइक्रोप्लास्टिक जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने हैं।
उन्होंने सतत विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई और कहा कि विकास की दिशा ऐसी होनी चाहिए, जिससे वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों के हित भी सुरक्षित रह सकें।
‘लोग क्या सोचेंगे’ छोड़कर कर्म पर दें ध्यान
विद्यार्थियों को भगवद्गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए राज्यपाल ने कहा कि कर्म ही जीवन है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि दूसरे उनके बारे में क्या सोचते हैं। उन्हें अपने कर्म, पढ़ाई और निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ज्ञान ऐसी संपत्ति है, जिसे कोई व्यक्ति उनसे छीन नहीं सकता। विद्यार्थियों को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर सही रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
504 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 35 को पदक
आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में वर्ष 2025 और 2026 शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। कुल 504 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
समारोह में 19 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 16 विद्यार्थियों को रजत पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री और ज्ञान हासिल करने का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज और मानवता के हित में भी किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब बनाने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ लौह अयस्क जैसे प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता वाला राज्य है और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अब राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाते हुए एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे लक्ष्यों को हासिल करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य हासिल करने की अपील की। उन्होंने नशे से दूर रहने तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश भी दिया।
ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं रक्षा वैज्ञानिक डॉ. वी. सतीश रेड्डी, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक, कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे सहित विश्वविद्यालय की शासी परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, विद्यार्थी और उनके पालक मौजूद रहे।

