दुर्ग/भिलाई। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम कुथरेल और भिलाई क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हादसे में भिलाई मूल निवासी एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई। मंगलवार को जब मृतकों के शव गांव पहुंचे तो पूरे क्षेत्र में मातम छा गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद घूमने निकला था परिवार
मृतकों में आईटी इंजीनियर अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची चंद्राकर और उनके दो बेटे दर्श एवं अक्षद शामिल हैं। अरविंद चंद्राकर बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में कार्यरत थे और परिवार के साथ वहीं रहते थे। बताया गया कि उनके बच्चे अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लेने हिमाचल प्रदेश गए थे। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद परिवार पर्यटन के लिए हिमाचल की वादियों की ओर निकल पड़ा था।
500 मीटर गहरी खाई में गिरी कार
जानकारी के अनुसार 29 मई की रात चंबा जिले के बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग पर उनकी अर्टिगा कार अनियंत्रित होकर लगभग 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई।
जीपीएस लोकेशन से चला हादसे का पता
देर रात तक वाहन के वापस नहीं लौटने पर टैक्सी मालिक को संदेह हुआ। जीपीएस लोकेशन जांचने पर वाहन एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई दिया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू हुई। अगले दिन पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और दुर्घटना की पुष्टि हुई।
दुर्गम पहाड़ियों में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
दुर्घटनास्थल अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खड़ी पहाड़ियों, खराब मौसम और मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण शनिवार को शवों को निकालना संभव नहीं हो पाया। रविवार को पुलिस, प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त अभियान चलाया। ह्यूमन चेन और रस्सियों की मदद से कई घंटे की मशक्कत के बाद सभी शवों को खाई से बाहर निकाला गया।
गांव पहुंचते ही पसरा मातम
मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे चारों शव रायपुर एयरपोर्ट से एंबुलेंस के माध्यम से ग्राम कुथरेल लाए गए। गांव में शव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाजजन शामिल हुए।
दुर्ग राज चंद्राकर समाज के अध्यक्ष प्रदीप चंद्राकर ने बताया कि गांव के इतिहास में यह पहली घटना है, जब एक ही परिवार के चार सदस्यों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
20 वर्षों से आईटी क्षेत्र में थे कार्यरत
अरविंद चंद्राकर के पिता श्यामलाल चंद्राकर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। अरविंद ने अपनी शिक्षा भिलाई में पूरी की थी और करीब 20 वर्ष पहले आईटी क्षेत्र में नौकरी मिलने के बाद बेंगलुरु में बस गए थे। परिजनों के अनुसार वे लंबे समय से एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में कार्यरत थे।
इन आठ लोगों की हुई मौत
हादसे में टैक्सी चालक विश्वास सल्होता, अरविंद चंद्राकर, प्राची चंद्राकर, दर्श चंद्राकर, अक्षद चंद्राकर, पी. जी. कार्तिघायन, उनकी पत्नी मनीमाला तथा पुत्र नंदन की मौत हुई है।
पूरे क्षेत्र में शोक
ताइक्वांडो प्रतियोगिता में बच्चों की सफलता का जश्न मनाने निकले दोनों परिवारों ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की अंतिम यात्रा बन जाएगी। हिमाचल की खूबसूरत वादियों में हुआ यह दर्दनाक हादसा अब भिलाई और ग्राम कुथरेल के लोगों की स्मृतियों में एक ऐसी त्रासदी बन गया है, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा।


