रायपुर, 21 अप्रैल 2026 |
करीब दो दशक पुराने बिजली चोरी के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृत आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने न सिर्फ 2007 की सजा को रद्द किया, बल्कि जमा किए गए जुर्माने की राशि को मृतक के कानूनी वारिसों को लौटाने का भी निर्देश दिया।
यह फैसला 17 अप्रैल 2026 को जस्टिस राजानी दुबे की एकल पीठ ने सुनाया।
⚖️ मामला क्या था?
मामला बिजली अधिनियम 2003 की धारा 135(ए) के तहत दर्ज किया गया था।
1 फरवरी 2006 को धमतरी जिले के सिरसिदा गांव स्थित एक हुल्लर मिल में बिजली विभाग की टीम ने निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान आरोप लगाया गया कि—
- बिजली मीटर से छेड़छाड़ की गई थी
- R-फेज को रिवर्स किया गया था
- मीटर की रीडिंग कम दिखाने के लिए मैग्नेट का उपयोग किया गया
इन आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और 2007 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी जोहत राम साहू को दोषी मानते हुए 1.44 लाख रुपये का जुर्माना और 6 महीने की सजा सुनाई थी।
🧾 हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कई गंभीर खामियां पाईं—
- कथित मैग्नेट मौके से बरामद नहीं हुआ
- जब्त मीटर की किसी तकनीकी विशेषज्ञ से जांच नहीं कराई गई
- अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से एक ही गवाह पर आधारित था
- पर्याप्त साक्ष्य और पुष्टिकरण (corroboration) का अभाव रहा
अदालत ने स्पष्ट कहा कि “संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, इसके लिए ठोस प्रमाण जरूरी है।”
📌 कोर्ट का अंतिम आदेश
- ट्रायल कोर्ट का 2007 का फैसला रद्द किया गया
- आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया गया
- जमा जुर्माने की राशि वारिसों को लौटाने का निर्देश
🔍 फैसले का महत्व
यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि लंबे समय बाद भी अदालतें निष्पक्षता के आधार पर न्याय सुनिश्चित कर सकती हैं—even posthumous justice (मरणोपरांत न्याय) के रूप में।


