7 हजार की रिश्वत पड़ी भारी: जल संसाधन विभाग का कर्मचारी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की जेल

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सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी-पेंशन फाइल के नाम पर मांगी थी रिश्वत, ACB ने रंगे हाथों दबोचा था

अंबिकापुर/रायपुर, 5 जून 2026। सरकारी काम कराने के बदले रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का एक अहम मामला सामने आया है। सरगुजा जिले के बहुचर्चित रिश्वत प्रकरण में विशेष न्यायालय ने जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सहायक ग्रेड-03 व्ही.के. सिन्हा को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2020 में 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

सेवानिवृत्त चौकीदार के लंबित भुगतान के एवज में मांगी थी रकम

जानकारी के अनुसार सरगुजा निवासी लरघुराम जल संसाधन विभाग में चौकीदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कुछ भुगतान तो प्राप्त हो गया, लेकिन ग्रेच्युटी और पेंशन से संबंधित अन्य लाभ लंबे समय तक लंबित रहे। परिजनों ने आरोप लगाया कि विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 व्ही.के. सिन्हा फाइल आगे बढ़ाने और भुगतान कराने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था।

शिकायत के मुताबिक आरोपी पहले भी कई बार “खर्चा-पानी” के नाम पर पैसे ले चुका था, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। बाद में उसने भुगतान प्रक्रिया पूरी कराने के लिए 8 हजार रुपये की मांग की थी।

शिकायत के बाद ACB ने बनाई रणनीति

रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो, अंबिकापुर से संपर्क किया। शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच 7 हजार रुपये में सौदा तय हुआ।

ट्रैप कार्रवाई में रंगे हाथों गिरफ्तार

13 अगस्त 2020 को एसीबी की टीम ने सुनियोजित ट्रैप कार्रवाई की। शिकायतकर्ता द्वारा तय रकम आरोपी को सौंपते ही टीम ने उसे जल संसाधन विभाग कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके से रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली गई।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और विस्तृत जांच शुरू की गई।

पांच साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया

जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। इसके बाद अदालत में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य प्रमाणों के आधार पर सुनवाई चलती रही।

करीब पांच वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, अंबिकापुर ने 4 जून 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी व्ही.के. सिन्हा को दोषी करार दिया और तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश

अदालत के इस फैसले को सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि नागरिक साहस दिखाकर शिकायत दर्ज कराएं और जांच में सहयोग करें तो भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई संभव है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन सरकारी कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग कर आम लोगों से अवैध लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

मामले की प्रमुख बातें

  • वर्ष 2020 में 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया कर्मचारी।
  • जल संसाधन विभाग में सहायक ग्रेड-03 पद पर था पदस्थ।
  • सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी और पेंशन फाइल के बदले मांगी थी रिश्वत।
  • एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई कर रंगे हाथों किया था गिरफ्तार।
  • विशेष न्यायालय ने सुनाई 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा।
  • 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

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