
कोरबा। नगर सेना में कमांडेंट ए.के. एक्का के खिलाफ नगर सैनिकों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को बिलासपुर से पहुंचे संभागीय कमांडेंट नरसिंग नेताम ने जवानों की शिकायतों पर चर्चा के लिए सम्मेलन आयोजित किया, लेकिन समाधान तो दूर, जांच अधिकारी के एक ‘सवाल’ ने विवाद की आग को और भड़का दिया।
महिला सैनिकों का आरोप—कमांडेंट की अश्लील टिप्पणियों से परेशान
महिला नगर सैनिकों ने आरोप लगाया कि कोरबा कमांडेंट ए.के. एक्का उनसे आपत्तिजनक और अश्लील बातें करते हैं।
महिला जवानों ने बताया कि—
प्रेग्नेंसी की बात कहने पर कमांडेंट पूछते—“बच्चा आगे से पैदा करते हो या पीछे से?”
अक्सर तंज कसते—“पांव भारी है क्या?”
महिला जवानों का कहना है कि ये टिप्पणियां लगातार की जाती थीं, जिससे कार्यस्थल का वातावरण असहज हो गया है।
जांच अधिकारी का उल्टा सवाल—“आप ही बताओ पांव भारी होने का मतलब क्या होता है?”
जब महिला सैनिकों ने अपनी शिकायतें जांच अधिकारी के सामने रखीं, तब उन्होंने शिकायत की गंभीरता को समझने के बजाय उल्टा वही सवाल पूछ लिया—
“आप ही बताओ पांव भारी होने का क्या मतलब होता है?”
जांच अधिकारी के इस सवाल पर सम्मेलन में मौजूद अफसर भी कुछ क्षण के लिए अवाक रह गए।
बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि—
“हर शब्द के दो अर्थ होते हैं, अधिकारी और जिसे कहा जा रहा है वही समझ सकते हैं कि किस संदर्भ में बोला गया।”
लेकिन यह सफाई भी जवानों के गुस्से को शांत नहीं कर सकी।
जवानों का विरोध—एक्का को हटाने की मांग पर अड़े
बैठक के दौरान महिला और पुरुष दोनों ही जवानों ने कमांडेंट पर तानाशाही, अनुशासनहीनता और महिलाओं के प्रति अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया।
एसडीएम और कोरबा सीएसपी की मौजूदगी में हुए इस सम्मेलन में जवानों ने साफ कहा—
“कमांडेंट हटे बिना हम पीछे नहीं हटेंगे।”
जांच अधिकारी बोले—हटाने का अधिकार नहीं, रिपोर्ट भेजेंगे ऊपर
संभागीय सेनानी ने जवानों की शिकायतें सुनीं और कहा कि—
उनके पास कमांडेंट हटाने का पावर नहीं है।
रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
लेकिन इस जवाब से जवान संतुष्ट नहीं हुए।
जवानों का अल्टीमेटम—सोमवार के बाद फिर आंदोलन
सम्मेलन से बाहर निकलते समय जवानों ने साफ कहा—
“समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। अगर ए.के. एक्का को नहीं हटाया गया, तो सोमवार के बाद बड़ा आंदोलन किया जाएगा।”
महिला जवानों ने यह भी कहा कि उन्होंने साक्ष्यों सहित अपनी बात रखी, बावजूद इसके जांच अधिकारी की सुनवाई में गंभीरता नजर नहीं आई।
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