आरप नदी के संरक्षण को नई दिशा: उद्गम स्थल पर 4.81 एकड़ भूमि का होगा अधिग्रहण, प्रदूषण रोकने 18.49 करोड़ की योजना

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी अरपा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया है। उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने शपथपत्र प्रस्तुत कर बताया कि पेंड्रा के अमरपुर स्थित अरपा नदी के उद्गम स्थल के विकास के लिए 4.81 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। साथ ही नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने, जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण और वैज्ञानिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति की समीक्षा के बाद अरपा नदी बेसिन के संरक्षण की कार्ययोजना पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। उद्गम स्थल पर भव्य कुंड निर्माण के लिए एजेंसी का चयन कर निविदा और अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

प्रदूषित पानी रोकने 18.49 करोड़ का प्रस्ताव

अरपा नदी में शहरी सीवेज का प्रवाह रोकने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने गौरेला नगर पालिका से 11.53 करोड़ रुपये तथा पेंड्रा नगर पालिका से 6.95 करोड़ रुपये का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) प्राप्त किया है। कुल 18.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

जलग्रहण क्षेत्र में 2,502 संरक्षण कार्य

नदी के जलस्तर को बेहतर बनाने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से 2,502 जल संरक्षण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें कंटूर ट्रेंच, गैबियन संरचनाएं, गली प्लग और चेक डैम शामिल हैं। वहीं, उद्गम स्थल से शुरुआती 10 किलोमीटर क्षेत्र में 484 विशेष जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

पौधरोपण से बढ़ेगी हरियाली

वन विभाग ने अरपा नदी के कैचमेंट क्षेत्र में 655 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण पूरा कर लिया है। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में नदी तट के 30 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सघन पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और भू-जल संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

जिला पंचायत सीईओ होंगे नोडल अधिकारी

मुख्य सचिव ने अरपा नदी पुनरुद्धार से जुड़े सभी अंतर-विभागीय कार्यों की निगरानी संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को सौंपी है। वे नदी के प्रवाह, जल गुणवत्ता और भू-जल स्तर की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करेंगे।

प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए राज्यस्तरीय एक्शन प्लान

राज्य सरकार ने प्रदेश की प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत सभी चयनित नदी उद्गम स्थलों की प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर डिजिटल मैपिंग की जाएगी। आईआईटी रुड़की, एनआईटी रायपुर और सीएसवीटीयू भिलाई के विशेषज्ञ परियोजनाओं की वैज्ञानिक समीक्षा कर रहे हैं। साथ ही विभागीय बजट, जिला खनिज न्यास, मनरेगा, कैम्पा, स्वच्छ भारत मिशन और 16वें वित्त आयोग के फंड का समन्वित उपयोग किया जाएगा।

जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में राज्य स्तरीय ‘स्रोत महोत्सव एवं कार्यशाला’ का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें पर्यावरणविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों के सुझावों के आधार पर भविष्य की नदी पुनरुद्धार योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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