रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के राजकुमार कॉलेज की एक शिक्षिका को 18 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए जाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए शिक्षिका की बहाली के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने बकाया वेतन 9 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।
1990 में हुई थी नियुक्ति
मामले के अनुसार सविता मोहंती को 21 जून 1990 को रायपुर के राजकुमार कॉलेज में ओडिया भाषा पढ़ाने के लिए सहायक शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 1994 में उनकी सेवा नियमित कर दी गई थी। इसके बाद उन्हें नियमित रूप से वेतन वृद्धि भी मिलती रही।
करीब 18 वर्षों तक सेवा देने के बाद 19 जून 2008 को कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें अचानक सेवा से हटा दिया। प्रबंधन की ओर से तर्क दिया गया कि स्कूल में ओडिया पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम हो गई है। साथ ही शिक्षिका के पास बीएड की डिग्री नहीं होने के कारण उन्हें किसी अन्य विषय में शिक्षक के तौर पर समायोजित नहीं किया जा सकता।
शिक्षिका ने फैसले को दी चुनौती
सेवा समाप्त किए जाने के खिलाफ सविता मोहंती ने अपील की। 8 मई 2012 को संबंधित अपीलीय अधिकारी ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोबारा सेवा में लेने और बकाया वेतन का भुगतान 9 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज के साथ करने का आदेश दिया।
इस आदेश को कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 17 मार्च 2026 को प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दाखिल की।
कोर्ट ने बीएड की दलील को माना अनुचित
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि 1990 में जारी नियुक्ति पत्र में बीएड की डिग्री को अनिवार्य योग्यता नहीं बनाया गया था। वर्ष 1994 में जब शिक्षिका की सेवा नियमित की गई, तब भी कॉलेज प्रबंधन ने बीएड की योग्यता को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि शिक्षिका को सेवा से हटाते समय कॉलेज प्रबंधन ने मुख्य आधार विद्यार्थियों की संख्या में कमी को बताया था। ऐसे में करीब 18 वर्ष की सेवा के बाद बीएड की डिग्री नहीं होने को आधार बनाकर नौकरी समाप्त करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कॉलेज की अपील खारिज
डिवीजन बेंच ने राजकुमार कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए शिक्षिका की सेवा में बहाली के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट के निर्देश के अनुसार उन्हें बकाया वेतन 9 प्रतिशत ब्याज सहित दिया जाना है। इस फैसले से लंबे समय तक सेवा देने के बाद अचानक नौकरी से हटाए जाने के मामलों में कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी संदेश गया है।


