
दुर्ग-भिलाई। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद अब परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में दुर्ग के भारती कृषि महाविद्यालय के सहायक व्याख्याता समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रबंधन ने भी कार्रवाई की है। प्राचार्य डॉ. एके दुबे और कथित मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया को नौकरी से बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर दावा किया है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच जाता था। उनके मुताबिक, प्रश्नपत्र PDF के रूप में तैयार कर WhatsApp के जरिए आगे शेयर किए जाते थे। एक प्रश्नपत्र के लिए कथित तौर पर एक से पांच हजार रुपए तक लिए जाने की बात सामने आई है।
छात्रों के बीच मिलकर जुटाई जाती थी रकम
छात्रों का दावा है कि कई बार कुछ विद्यार्थी मिलकर प्रश्नपत्र खरीदने के लिए रकम जुटाते थे। कोई छात्र एक-दो हजार रुपए तक देता था और राशि पूरी होने के बाद PDF अन्य छात्रों तक भेज दी जाती थी। कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि उन्हें अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्र खरीदने के ऑफर मिले थे, हालांकि उन्होंने पेपर खरीदने से इनकार कर दिया।
बताया गया है कि कुछ चुनिंदा छात्रों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र लेकर दूसरे विद्यार्थियों तक पहुंचाने और इसके बदले पैसे कमाने के लिए कहा जाता था। हालांकि, छात्रों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की पुलिस जांच में पुष्टि होना अभी बाकी है।
कई विषयों के पेपर लीक होने का दावा
छात्रों के अनुसार, इस सत्र में अब तक हुई करीब 10-11 विषयों की परीक्षाओं में से कुछ के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही उपलब्ध होने की चर्चा थी। जिस प्रश्नपत्र के बड़े स्तर पर प्रसारित होने के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द की, फिलहाल पुलिस कार्रवाई उसी मामले से जुड़ी है।
एक छात्र के मुताबिक, परीक्षा के दौरान नकल की सामग्री के साथ पकड़े गए एक विद्यार्थी से जुड़ी घटना के बाद अगले दिन होने वाले प्रश्नपत्र की तस्वीर भी सामने आई थी। कथित तस्वीर में कॉलेज की सीढ़ियां दिखाई देने की बात कही गई, जिसके बाद कॉलेज से प्रश्नपत्र बाहर जाने का संदेह गहराया।
NSUI ने 2022 और 2024 की शिकायतों का भी किया दावा
NSUI रायपुर जिला अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने दावा किया है कि IGKV में प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत पहली बार सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, 2022 और 2024 में भी छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंचने की शिकायतें की गई थीं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2024 में मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। हालांकि, इन पुराने मामलों और वर्तमान मामले के बीच संबंध तथा आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से होना आवश्यक है।
कॉलेज प्रबंधन ने प्राचार्य पर भी की कार्रवाई
भारती कृषि महाविद्यालय के डायरेक्टर सुशील चंद्राकर के अनुसार, सहायक व्याख्याता योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से कॉलेज में कार्यरत था और पिछले करीब एक वर्ष से उसे विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र लाने तथा जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रबंधन के मुताबिक, विश्वविद्यालय से प्राप्त प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखना और उन्हें निर्धारित स्थान पर बंद करके रखना प्राचार्य की जिम्मेदारी थी। प्रश्नपत्र की सुरक्षा में लापरवाही के आरोप के चलते प्राचार्य डॉ. एके दुबे पर भी कार्रवाई की गई।
पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
पुलिस ने इस मामले में कथित मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस ने आरोपियों से नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से बाहर निकला, कितने विद्यार्थियों तक पहुंचा और कथित तौर पर इसमें कितने लोगों की भूमिका रही।
फिलहाल छात्रों द्वारा किए गए पेपर की कीमत, WhatsApp पर PDF शेयर करने और पूर्व परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
