
दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर महाविद्यालय, दुर्ग के वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा एम.एससी. पूर्वार्द्ध एवं अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ (Induction) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विभाग की शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रयोगशाला एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराते हुए उन्हें उच्च शिक्षा, शोध एवं कौशल विकास के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात् अतिथियों एवं प्राध्यापकों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में वनस्पति शास्त्र के क्षेत्र के विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य अतिथि डॉ. एम. एल. नायक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में वनस्पति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जी. एस. ठाकुर ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए विभाग में संचालित विभिन्न शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों तथा विभाग की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विभाग एवं महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नियमित अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान, प्रयोगशाला कार्य एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सहभागिता आवश्यक है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि एम.एससी. एक शोधपरक एवं व्यावहारिक पाठ्यक्रम है। विद्यार्थियों के लिए विषय के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में स्वयं कार्य करने से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अवलोकन क्षमता, तार्किक सोच एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है।
प्राचार्य ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि AI शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उपयोगी साधन है, लेकिन विद्यार्थियों को इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ स्वयं सीखने, प्रयोग करने, परिणामों का विश्लेषण करने तथा स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एम. एल. नायक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। आज के समय में केवल पुस्तकीय अथवा डिजिटल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को शोध, प्रयोगात्मक कार्य एवं व्यावहारिक ज्ञान के प्रति विशेष रुचि विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि AI आज शिक्षा और शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसके साथ विद्यार्थियों का व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक रूप से दक्ष होना भी आवश्यक है।
डॉ. नायक ने कहा कि वनस्पति शास्त्र जैसे विषय में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में स्वयं कार्य करने, प्रयोगों के वैज्ञानिक आधार को समझने तथा प्राप्त परिणामों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं अनुसंधान क्षमता विकसित करना उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विभागीय एवं अनुसंधान गतिविधियों में भाग लेने तथा नए विषयों को समझने और उन पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक कौशल एवं शोध-अनुभव विद्यार्थियों के भविष्य में उच्च शिक्षा तथा रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापकों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉ. विजय लक्ष्मी नायडू, डॉ. श्रीराम कुंजाम, डॉ. मोतीराम साहू, डॉ. राजेश्वरी प्रभा लहरे, डॉ. दनेश्वर प्रसाद एवं प्रोफेसर देवीश्री ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, प्रयोगशाला कार्य, अनुसंधान एवं विभागीय गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में एम.एससी. पूर्वार्द्ध एवं एम.एससी. अंतिम वर्ष के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों को विभाग की कार्यप्रणाली, प्रयोगशाला सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों, अनुसंधान गतिविधियों तथा आगामी शैक्षणिक कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सतीश कुमार सेन द्वारा किया गया। अंत में डॉ. श्रीराम कुंजाम ने आभार प्रदर्शन करते हुए मुख्य अतिथि, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल शैक्षणिक, अनुसंधान एवं व्यावसायिक भविष्य के लिए शुभकामनाओं के साथ हुआ।
