सचिन तेंदुलकर-निर्मला सीतारमण के नाम पर 45 लाख की साइबर ठगी, रिटायर्ड BSP कर्मचारी से ऐंठे करोड़ों के मुनाफे का झांसा, 9वीं फेल आरोपी अरेस्ट

Spread the love

दुर्ग/भिलाई। भिलाई में ऑनलाइन निवेश के नाम पर रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी से 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने निवेश को भरोसेमंद दिखाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया। मामले में भिलाई नगर पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी 9वीं कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। मामले के मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

फेसबुक विज्ञापन देखकर निवेश के जाल में फंसे

भिलाई के हुडको निवासी 61 वर्षीय जयंत बागची बीएसपी से सेवानिवृत्त हैं। वे भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके हैं। पुलिस को दी शिकायत के अनुसार, 10 मार्च 2026 को फेसबुक चलाते समय उन्हें ऑनलाइन निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में बड़े नामों का इस्तेमाल होने के कारण उन्हें योजना भरोसेमंद लगी।

विज्ञापन में दिए लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्होंने रजिस्ट्रेशन किया। इसके बाद कृतिका नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 18,998 रुपए जमा करवाए। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने खुद को अकाउंट मैनेजर और निवेश विशेषज्ञ बताकर उनसे लगातार रकम जमा कराई।

ट्रेडिंग, मार्जिन, सोना और ऑयल में निवेश का झांसा

पुलिस के अनुसार, सिद्धार्थ विपुल नाम के व्यक्ति ने खुद को अकाउंट मैनेजर बताया और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश का झांसा दिया। आरोपियों ने दावा किया कि उनका कारोबार यूके, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में है।

17 मार्च को 1 लाख रुपए और 24 व 25 मार्च को 5-5 लाख रुपए जमा करवाए गए। इसके बाद मार्जिन बढ़ाने के नाम पर भी रकम मांगी गई।

26 मार्च को करण तनेजा नाम के व्यक्ति से पीड़ित की बात कराई गई। उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच युद्ध का हवाला देते हुए सोने की कीमत बढ़ने की बात कही और सोने में निवेश को फायदे का सौदा बताया। इसके बाद 27 मार्च को 25 लाख रुपए जमा कराए गए। 9 अप्रैल को ऑयल ट्रेडिंग के नाम पर 5 लाख और 16 अप्रैल को 4 लाख रुपए जमा करवाए गए। इस तरह पीड़ित से कुल 45,18,998 रुपए ले लिए गए।

खाते में दिखाया 2.71 लाख डॉलर का मुनाफा

जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने नया झांसा दिया। उन्होंने ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर का मुनाफा और मूल रकम दिखा दी।

पीड़ित ने करीब 2.70 लाख अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए बैंक खाते की जानकारी दी। आरोपियों ने इसे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन बताते हुए रकम आने में दो-तीन दिन लगने की बात कही।

34 लाख रुपए टैक्स मांगा, फिर 12 लाख पर आए

20 अप्रैल को रकम की निकासी को लेकर पूछताछ करने पर आरोपियों ने कहा कि करीब 2.70 लाख डॉलर निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके लिए 34 लाख रुपए से अधिक की मांग की गई।

पीड़ित ने टैक्स की रकम काटकर बाकी पैसा देने की बात कही तो आरोपियों ने मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी। उन्होंने दावा किया कि यह राशि जमा करने के बाद आंशिक भुगतान कर दिया जाएगा। समीर नाम के व्यक्ति ने भी पीड़ित से बातचीत कर टैक्स जमा करना जरूरी बताया।

अरुणाचल प्रदेश के खाते में RTGS के बाद हुआ शक

22 अप्रैल को आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित की रकम तैयार है और टैक्स जमा होते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद उसे अरुणाचल प्रदेश के एक बैंक खाते में RTGS करने के लिए कहा गया।

यहीं पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ। उन्हें समझ आया कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर उनके साथ साइबर ठगी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक को भी सूचना दी।

बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस

शिकायत के आधार पर भिलाई नगर थाने में अपराध क्रमांक 217/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच टीम ने बैंक खातों में हुए लेन-देन, तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल जानकारी का विश्लेषण किया।

जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीम मध्यप्रदेश के बैतूल पहुंची और 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक विशाल वर्ष 2020 में मजदूरी के लिए पुणे गया था, जहां उसके नाम पर एक ऑनलाइन अकाउंट खुलवाया गया था। ठगी की रकम इसी अकाउंट में पहुंची थी।

मोबाइल, चेकबुक और आधार कार्ड जब्त

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बैंक की चेकबुक, आधार कार्ड और ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन जब्त किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया है।

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

साइबर ठगी से बचाव: किसी भी अनजान निवेश लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या बड़े मुनाफे के दावे पर तुरंत भरोसा न करें। निवेश से पहले कंपनी और प्लेटफॉर्म की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करें। ठगी होने की स्थिति में तुरंत बैंक को सूचना देने के साथ साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?