बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी एक सदस्य के नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण को पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संकट का समुचित मूल्यांकन करना होगा।
खंडपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। ऐसे में केवल तकनीकी आधारों पर आवेदन निरस्त करना योजना की मानवीय और कल्याणकारी भावना के विपरीत है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने अंबिकापुर नगर निगम की अपील को खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा।
क्या है मामला
मामले में याचिकाकर्ता के पिता अंबिकापुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनके निधन के बाद परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गए, जो उनकी आय पर निर्भर थे। पिता की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया गया कि उसकी मां पहले से सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं।
इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने नियुक्ति से इनकार करने के आदेश को निरस्त करते हुए नगर निगम को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया था।
खंडपीठ ने क्या कहा
नगर निगम आयुक्त ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील दायर की। निगम की ओर से तर्क दिया गया कि राज्य सरकार की 14 जून 2013 की नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी मां का वेतन बेहद कम है और वह पूरे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही अधिकारियों ने परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आंकलन किए बिना ही आवेदन खारिज कर दिया।
सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि परिवार ने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया था। केवल इस आधार पर कि परिवार का एक सदस्य कम वेतन वाली सरकारी नौकरी में है, यह नहीं माना जा सकता कि परिवार आर्थिक संकट से उबर चुका है।
कल्याणकारी और मानवीय योजना है अनुकंपा नियुक्ति
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक कल्याणकारी और मानवीय योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक संकट में फंसे परिवारों को राहत पहुंचाना है। इसलिए अधिकारियों को ऐसे मामलों में व्यावहारिक और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए परिवार की वास्तविक परिस्थितियों का मूल्यांकन करना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने का निर्णय केवल इस आधार पर नहीं लिया जा सकता कि परिवार का कोई सदस्य पहले से नौकरी में है, बल्कि परिवार की समग्र आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है।


