बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार: 4 घंटे में समंदर तक पहुंच, रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
रायपुर, 21 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक नई आर्थिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त होने जा रहा है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) के निर्माण से बस्तर अब सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जुड़ सकेगा। भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर क्षेत्र की कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार के अवसरों को नई दिशा देगा।
7-9 घंटे का सफर अब सिमटेगा 4 घंटे में
वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक की यात्रा ओडिशा के दुर्गम घाटों से होकर गुजरती है, जिसमें 7 से 9 घंटे का समय लगता है।
नया कॉरिडोर इस दूरी को घटाकर महज 3.5 से 4 घंटे कर देगा। इससे परिवहन लागत में कमी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।
नबरंगपुर इंटरचेंज बनेगा बस्तर का कनेक्टिविटी हब
कॉरिडोर से सीधे जुड़ने के लिए ओडिशा का नबरंगपुर प्रमुख भूमिका निभाएगा।
जगदलपुर से मात्र 50-60 किमी की दूरी तय कर वाहन इस इंटरचेंज के जरिए हाई-स्पीड कॉरिडोर में प्रवेश कर सकेंगे, जिससे बस्तर की पहुंच सीधे बंदरगाह तक हो जाएगी।
बस्तर उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
बस्तर की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और ढोकरा शिल्प अब सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच सकेंगे।
कम लागत के कारण ये उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे किसानों और शिल्पकारों की आय में वृद्धि होगी।
रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव को जोड़ते हुए औद्योगिक गतिविधियों को गति देगा।
लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और रियल एस्टेट में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
खनिज संसाधनों के निर्यात में आएगा उछाल
बस्तर क्षेत्र लौह अयस्क सहित कई खनिजों से समृद्ध है।
कॉरिडोर बनने के बाद इन खनिजों का परिवहन तेज होगा और निर्यात में वृद्धि से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
पर्यटन को मिलेगा वैश्विक मंच
बेहतर कनेक्टिविटी से बस्तर के पर्यटन स्थलों जैसे
- बस्तर दशहरा
- दंतेश्वरी मंदिर
- चित्रकोट जलप्रपात
- तीरथगढ़ जलप्रपात
तक पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, जिससे स्थानीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
पर्यावरण संतुलन के साथ आधुनिक इंजीनियरिंग
कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी राज्य की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरेगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मंकी कैनोपी, अंडरपास और ओवरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- कुल लंबाई: 464 किमी
- लागत: लगभग ₹16,491 करोड़
- प्रकार: 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर
- योजना: भारतमाला परियोजना
सरकार का बयान
विष्णु देव साय ने कहा कि यह कॉरिडोर बस्तर को वैश्विक बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा।
वहीं अरुण साव के अनुसार, यह परियोजना राज्य में कनेक्टिविटी, उद्योग और रोजगार को नई गति देगी।
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बस्तर के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बनने जा रहा है। यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।


