दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पद के कथित दुरुपयोग और दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से राशि लिए जाने के मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है।
मामले के अनुसार, कुलसचिव पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रशासनिक अधिकारों का कथित दुरुपयोग करते हुए अपने घर में खाना बनाने का काम करने वाली महिला शुभांगी मराठे को विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कराया। आरोप है कि महिला ने विश्वविद्यालय में नियमित रूप से काम नहीं किया और केवल महीने के अंतिम दिन उपस्थित होकर पूरे महीने की उपस्थिति दर्ज करती थी।
शिकायत के मुताबिक, वेतन मिलने के बाद महिला को करीब 2,200 रुपये अपने खाते में रखने और शेष लगभग 9,000 रुपये कुलसचिव के पुत्र उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था। जून में महिला ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी दी और पूरा वेतन दिलाने के साथ विश्वविद्यालय में वास्तविक कार्य पर नियोजित करने की मांग की।
महिला ने अपने दावे के समर्थन में पासबुक की छायाप्रति, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की।
समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलसचिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए दुर्ग एसएसपी को रिपोर्ट सौंपी गई। इसके बाद मोहन नगर थाने में 3 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) के तहत FIR दर्ज की गई।
FIR को चुनौती देते हुए कुलसचिव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके अलावा उन्होंने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन और उसकी रिपोर्ट को भी चुनौती दी थी। मामले में छत्तीसगढ़ शासन, उच्च शिक्षा विभाग, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों के साथ शुभांगी मराठे को भी पक्षकार बनाया गया था।
हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले की जांच आगे जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। मामले में दर्ज आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम के आधार पर ही होगी।


