
नई दिल्ली 25 जुलाई 2026। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के पैरोकार सोनम वांगचुक ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताते हुए कहा कि अब केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक और ठोस सुधार लागू किए जाने चाहिए।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश के अंत में लिखा, “अब जवाबदेही से आगे बढ़कर सुधारों की ओर बढ़ने का समय है।” उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केवल पहला कदम है। अब सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने आगे लिखा, “यह लोकतंत्र की जीत है। यह सीधे सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत है। यह शांति, धैर्य और लगातार संघर्ष की भी जीत है।” वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और जब लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखते हैं, तो उसका असर जरूर दिखाई देता है।
छात्र आंदोलन का भी किया जिक्र
वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG विवाद और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आया है। ऐसे में यह फैसला आंदोलन से जुड़े छात्रों और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे शुरुआत से ही केवल जवाबदेही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते रहे हैं।
छात्रों और आंदोलन के समर्थकों को दी बधाई
सोनम वांगचुक ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और देशभर के Gen Z छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने अधिकारों की मांग को लगातार मजबूती से उठाया। उन्होंने उन सभी नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बिना डरे आंदोलन का समर्थन किया और अपनी आवाज बुलंद की।
