दुर्ग। छत्तीसगढ़ में पिछले 22 दिनों से आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग ने अंतिम चेतावनी जारी की है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिए हैं कि हड़ताल पर गए अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपने-अपने स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करें। निर्धारित समय सीमा तक वापस नहीं लौटने वाले शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने और उनकी जगह वैकल्पिक शिक्षकों की नियुक्ति करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
इधर, दुर्ग में आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों के धरना स्थल पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए देर रात टेंट हटवा दिया। गुरुवार सुबह धरना स्थल पहुंचे करीब 50 प्रदर्शनकारी शिक्षकों को पुलिस ने बसों में बैठाकर वहां से हटाया। धरना स्थल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पुलिस बल तैनात कर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आंदोलन में नए लोगों की भागीदारी रोकी जा सके।
समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग पर आंदोलन
अतिथि शिक्षक संघ लंबे समय से संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। संघ का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक वर्षों से विशेषकर बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों सहित दूरस्थ इलाकों के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनके भविष्य को लेकर कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है।
मंत्री निवास का किया था घेराव
आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का लगभग 24 घंटे तक घेराव भी किया था। मंत्री से चर्चा का आश्वासन मिलने के बाद शिक्षक वापस धरना स्थल पर लौट आए थे, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने से आंदोलन जारी रखा गया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टेंट हटाने और धरना स्थल खाली कराने से उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षकों ने दोबारा धरना देने की भी घोषणा की है।
27 जुलाई तक नहीं लौटे तो जाएगी नौकरी
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि तक स्कूल नहीं लौटने वाले अतिथि शिक्षकों की सेवाएं विभागीय निर्देशों के अनुसार समाप्त कर दी जाएंगी। साथ ही विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित स्कूलों में तत्काल वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
फिलहाल सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आंदोलन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

