बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि चुनावी कार्य में लगे अधिकारियों का बिना केंद्रीय चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के किया गया तबादला अवैध और मनमाना माना जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे कार्यों में लगे अधिकारी उस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण में होते हैं। ऐसे में उनका ट्रांसफर बिना आयोग की अनुमति के नहीं किया जा सकता।
क्या है मामला
मामला बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला में पदस्थ एक अधिकारी से जुड़ा है, जिन्हें अतिरिक्त रूप से असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर की जिम्मेदारी भी दी गई थी। अधिकारी उस समय मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान उनका तबादला कर दिया गया, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
पक्षों के तर्क
- अपीलकर्ता पक्ष का कहना था कि ट्रांसफर आदेश लागू हो चुका है और संबंधित अधिकारियों ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
- वहीं, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चुनावी कार्य के दौरान बिना चुनाव आयोग की अनुमति ट्रांसफर करना नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए ट्रांसफर आदेश को अवैध करार दिया और अपील को खारिज कर दिया।
फैसले का महत्व
यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि चुनावी कार्यों में लगे अधिकारियों के तबादले के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है।

