प्रेम विवाह की सजा: पांच जोड़ों और परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, जीते-जी करा दिया मृत्यु भोज

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बिलासपुर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला

बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र और आसपास के गांवों में अंतर्जातीय प्रेम विवाह करने वाले पांच जोड़ों और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने प्रेम विवाह को परंपराओं के खिलाफ बताते हुए प्रभावित परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया है और सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया है।

प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ विरोध

जानकारी के अनुसार अलग-अलग जातियों के बालिग युवक-युवतियों ने अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था। इसके बाद समाज के कुछ स्वयंभू ठेकेदारों ने बैठकों का आयोजन कर परिवारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। कई मामलों में जुर्माना लगाया गया और विरोध करने वाले परिवारों को समाज से बाहर कर दिया गया।

हुक्का-पानी बंद, सामाजिक कार्यक्रमों में भी रोक

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें गांव के सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से वंचित किया जा रहा है। गांव के कुओं से पानी भरने, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने और समुदाय से जुड़े अन्य कार्यों में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है। इससे परिवारों को रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राशन और मजदूरी तक पर लगाया प्रतिबंध

सामाजिक बहिष्कार का असर परिवारों की आजीविका पर भी पड़ा है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें राशन दुकानों से सामान खरीदने में दिक्कतें हो रही हैं। वहीं मजदूरी और अन्य रोजगार के अवसरों से भी दूर रखा जा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

जीते-जी मृत्यु भोज और दशगात्र की रस्म

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि कुछ परिवारों ने सामाजिक दबाव के चलते अपने ही रिश्तेदारों का जीते-जी मृत्यु भोज और दशगात्र कर दिया। रिश्ते खत्म करने की इस अमानवीय परंपरा ने पीड़ितों को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे सामाजिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।

जान से मारने की धमकियों का भी आरोप

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं। भय के माहौल के कारण कई लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि सामाजिक दबाव और धमकियों के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।

प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग

स्थिति से परेशान सभी पीड़ित परिवार जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा प्रदान करने, सामाजिक बहिष्कार पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न्याय और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाया जाए।

जांच और कार्रवाई की उम्मीद

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन से जांच और आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सकेगी और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा।

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