साइंस कॉलेज दुर्ग में राजनीति विज्ञान परिषद का गठन, Gen Z और पर्यावरण की राजनीति पर व्याख्यान

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दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा रूसा 2.0 के अंतर्गत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के निर्देशानुसार राजनीति विज्ञान परिषद का गठन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अकादमिक ज्ञान और समसामयिक राजनीतिक विषयों की समझ विकसित करने के उद्देश्य से अतिथि व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रोफेसर डॉ. राकेश डेढ़गवें ने “वैश्वीकरण के दौर में Gen Z की पहचान और वैश्विक राष्ट्रवाद” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण, डिजिटल संचार और सोशल मीडिया के विस्तार ने नई पीढ़ी की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक पहचान को व्यापक वैश्विक संदर्भ प्रदान किया है। उन्होंने Gen Z के बीच स्थानीय एवं वैश्विक पहचान के अंतर्संबंध तथा बदलते राष्ट्रवाद पर विस्तार से चर्चा की।

दूसरे प्रमुख वक्ता सहायक प्राध्यापक श्री राहुल उपाध्याय ने “पर्यावरण की राजनीति और सतत् विकास” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, पर्यावरणीय असमानता और विकास नीतियों को वर्तमान राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दे बताया। उन्होंने आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को सतत् विकास के लिए आवश्यक बताया।

परिषद के पदाधिकारियों का चयन

कार्यक्रम के अंत में राजनीति विज्ञान परिषद के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई गई और परिषद का उद्घाटन किया गया। परिषद में प्रीति महिलांगे को अध्यक्ष, श्वेता साहू को उपाध्यक्ष, विकास बारले को सचिव तथा उपासना साहू को उपसचिव चुना गया।

इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष तरुण कुमार साहू, डॉ. राजेश्वरी जोशी, डॉ. रश्मि गौर, डॉ. राखी भारती, शहबाज अली एवं अमित सिंह उपस्थित रहे।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने दोनों विषयों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने सरल एवं विषयपरक ढंग से उत्तर दिया। कार्यक्रम से विद्यार्थियों को वैश्वीकरण, Gen Z की बदलती पहचान, वैश्विक राष्ट्रवाद, पर्यावरणीय राजनीति और सतत् विकास जैसे समसामयिक विषयों को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में समझने का अवसर मिला। विभागीय शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अकादमिक विमर्श और सक्रिय सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया।

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