छत्तीसगढ़ में 22 सितंबर से बसों का अनिश्चितकालीन महाबंद, बसों के थमेंगे पहिए

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रायपुर, 8 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यातायात महासंघ ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी 22 सितंबर से अनिश्चितकालीन बस महाबंद का ऐलान किया है। हड़ताल शुरू होने पर प्रदेशभर में करीब 12 हजार बसों का संचालन प्रभावित होने की संभावना है। इससे रोजाना बसों से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

9 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी

बस ऑपरेटर लंबे समय से किराया, टैक्स और संचालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। महासंघ की प्रमुख मांगों में यात्री बस किराए में बढ़ोतरी के साथ-साथ सिंगल स्लीपर बसों के लिए सिंगल टैक्स व्यवस्था लागू करना शामिल है।

बस संचालकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में बढ़ती लागत और विभिन्न करों के कारण बस संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर महासंघ ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं।

ई-बसों के संचालन को लेकर भी स्पष्ट नियम की मांग

बस ऑपरेटरों ने प्रदेश में संचालित होने वाली ई-बसों को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। महासंघ चाहता है कि ई-बसों के संचालन को नगर निगम सीमा तक सीमित रखने के संबंध में स्पष्ट नियम तय किए जाएं।

महासंघ का तर्क है कि पारंपरिक निजी बस संचालकों और ई-बसों के बीच संचालन क्षेत्र को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि परिवहन व्यवस्था में संतुलन बना रहे।

रोजाना 4.80 लाख यात्रियों पर पड़ सकता है असर

प्रस्तावित हड़ताल का सबसे बड़ा असर आम यात्रियों पर पड़ने की संभावना है। महासंघ के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन करीब 4 लाख 80 हजार यात्री बसों के माध्यम से आवागमन करते हैं। ऐसे में यदि हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहती है तो यात्रियों के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा, नौकरी और अन्य गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

800 बस ऑपरेटर आंदोलन में होंगे शामिल

महासंघ के मुताबिक प्रदेशभर से करीब 800 बस ऑपरेटर आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। हड़ताल के दौरान बसों को बस स्टैंड पर खड़ा कर संचालन बंद रखने की योजना है। इसके जरिए सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी की गई है।

सरकार से बातचीत पर टिकी नजर

फिलहाल 22 सितंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन महाबंद को लेकर यात्रियों और परिवहन क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। अब सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच होने वाली बातचीत अहम होगी। यदि वार्ता के जरिए मांगों पर सहमति बनती है तो हड़ताल टल सकती है, लेकिन समाधान नहीं निकलने की स्थिति में प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं।

ऐसे में आगामी दिनों में सरकार और यातायात महासंघ के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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