बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग में पदस्थापना को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षण कैडर के कर्मचारियों को गैर-शैक्षणिक प्रशासनिक पदों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने विद्यालय शिक्षा विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक व्याख्याता को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का प्रभार सौंपा गया था।
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने यह निर्णय रवि कुमार गौतम बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य (WPS 4582/2026) मामले में 23 जून 2026 को सुनाया। अदालत ने कहा कि शिक्षण और प्रशासनिक कैडर के बीच नियमों के तहत स्पष्ट विभाजन किया गया है, जिसे प्रशासनिक सुविधा के नाम पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मामला क्या था?
याचिकाकर्ता रवि कुमार गौतम वर्ष 2015 से सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (ABEO) के पद पर कार्यरत हैं और जुलाई 2025 से बलौदा ब्लॉक के प्रभारी बीईओ के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। लेकिन 10 जून 2026 को शिक्षा विभाग ने उनका प्रभार हटाकर एक व्याख्याता एवं प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार शर्मा को बीईओ का प्रभार सौंप दिया। इस आदेश को रवि कुमार गौतम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अदालत की प्रमुख टिप्पणियां
उच्च न्यायालय ने कहा कि—
- सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रशासनिक कैडर का पद है, जबकि व्याख्याता शिक्षण कैडर का सदस्य होता है।
- नियम, 2026 के अनुसार बीईओ का पद केवल पदोन्नति या निर्धारित प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया से ही भरा जा सकता है।
- केवल प्रभारी प्राचार्य होने के आधार पर किसी व्याख्याता को बीईओ का प्रभार नहीं दिया जा सकता।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 के तहत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक प्रशासनिक कार्यों में तैनात नहीं किया जा सकता, सिवाय कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों के।
राज्य सरकार के तर्क खारिज
राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता के कार्य प्रदर्शन को असंतोषजनक बताते हुए आदेश का बचाव किया, लेकिन न्यायालय ने कहा कि सरकार इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आदेश रद्द
अदालत ने माना कि 10 जून 2026 का आदेश वैधानिक नियमों और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। इसके चलते न्यायालय ने उक्त आदेश को निरस्त करते हुए रिट याचिका स्वीकार कर ली।
फैसले का महत्व
यह निर्णय शिक्षा विभाग में शिक्षण एवं प्रशासनिक कैडर की अलग-अलग भूमिका को स्पष्ट करता है। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में विभागीय नियुक्तियां केवल निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही की जानी चाहिए तथा शिक्षकों को नियमित रूप से प्रशासनिक पदों पर तैनात नहीं किया जा सकता।*


