नाबालिग की अर्बाशन याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल बोर्ड से मांगी रिपोर्ट

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20 जुलाई तक रायपुर CMHO को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश, पीड़िता की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भसमापन (Medical Termination of Pregnancy) की अनुमति संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड यह जांच कर बताए कि गर्भसमापन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है या नहीं। इस संबंध में विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट 20 जुलाई 2026 तक हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

याचिका में बताया गया है कि रायपुर निवासी नाबालिग लड़की को आरोपी युवक ने शादी का झांसा देकर अपने प्रेमजाल में फंसाया और उसके साथ दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, गर्भावस्था की समस्या के समाधान के लिए पीड़िता ने हाईकोर्ट में गर्भसमापन की अनुमति की मांग करते हुए याचिका दायर की है।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि किसी भी निर्णय से पहले पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता अपने वैधानिक अभिभावक के साथ निर्धारित तिथि पर रायपुर CMHO के समक्ष मेडिकल परीक्षण के लिए उपस्थित हो।

अदालत ने आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया जाए। बोर्ड यह स्पष्ट करेगा कि गर्भसमापन से पीड़िता के जीवन या स्वास्थ्य पर कोई गंभीर खतरा तो नहीं है तथा चिकित्सकीय दृष्टि से यह प्रक्रिया सुरक्षित है या नहीं।

हाईकोर्ट ने पीड़िता की गरिमा और गोपनीयता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान परिवार की सहमति से एक वयस्क महिला सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, पीड़िता को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। साथ ही CMHO को परीक्षण के लिए आवश्यक परिवहन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा जांच के बाद पीड़िता को सुरक्षित रूप से उसके अभिभावक के साथ वापस भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही हाईकोर्ट याचिका पर आगे की सुनवाई करेगा और रिपोर्ट के आधार पर गर्भसमापन की अनुमति संबंधी निर्णय लिया जाएगा।

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