बिलासपुर में 20 साल बाद बाढ़ जैसे हालात: शहर जलमग्न, स्कूल बंद, 40 से अधिक लोगों का रेस्क्यू, 5 मेमू ट्रेनें रद्द

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बिलासपुर, 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पिछले दो दशकों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। गुरुवार दोपहर से शुरू हुई बारिश शुक्रवार तक जारी रही, जिससे शहर के अधिकांश इलाके जलमग्न हो गए। निचले क्षेत्रों में घरों में पानी घुस गया, कई परिवार पूरी रात फंसे रहे और प्रशासन को बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा।

जिले में पिछले 24 घंटों में औसतन 74.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सीपत में सबसे अधिक 110.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। लगातार बारिश के कारण अरपा चेक डैम की नहर टूट गई, जिससे देवरीखुर्द, मानिकपुर और आसपास के कई इलाकों में पानी भर गया। दोमुहानी क्षेत्र में 10 से अधिक मकान टापू बन गए और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए SDRF की टीम को रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।

प्रशासन के अनुसार सरकंडा और चांटीडीह के निचले इलाकों से अब तक 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर पानी में डूब जाने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे पेयजल संकट भी गहरा गया। कलेक्टर के सरकारी बंगले में भी पानी भर गया, जहां नगर निगम की टीम जल निकासी में जुटी रही।

बारिश का असर रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा। बिलासपुर रेलवे स्टेशन और यार्ड में ट्रैक पर पानी भरने के कारण 5 मेमू ट्रेनें रद्द कर दी गईं, जबकि 3 ट्रेनों का संचालन आंशिक रूप से बदला गया। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय लिया।

वहीं, बिलासपुर–मस्तूरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर सड़क के ऊपर 4 से 5 फीट तक पानी बहने से यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया। कोटमीसोनार स्थित लीलागर नदी के पुल पर भी तेज बहाव के कारण आवागमन रोक दिया गया है।

भारी जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। लोगों से नदी-नालों, रपटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों तक बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश, तेज हवा और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है।

प्रशासन, नगर निगम और SDRF की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं तथा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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