अतिथि व्याख्याताओं को भी मिलेगा सवेतन मातृत्व अवकाश का लाभ, हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 का लाभ केवल नियमित सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल, संविदा कर्मचारियों तथा महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं को भी सवेतन मातृत्व अवकाश का अधिकार प्राप्त है।

यह फैसला रायपुर निवासी अतिथि व्याख्याता शिल्पी शुक्ला की याचिका पर सुनाया गया। शिल्पी नवंबर 2022 से शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में अतिथि व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। गर्भावस्था के दौरान उन्हें 13 सितंबर 2025 से मातृत्व अवकाश प्रदान किया गया था और 20 मार्च 2026 को उन्होंने पुनः कार्यभार ग्रहण किया।

अवकाश अवधि के वेतन भुगतान के लिए आवेदन करने पर उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें नियमित कर्मचारी नहीं होने का हवाला देते हुए लाभ देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि मातृत्व लाभ एक वैधानिक और मानवीय अधिकार है तथा नियुक्ति के स्वरूप के आधार पर महिला कर्मचारी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता नियमित कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए वे वित्तीय लाभ की पात्र नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों, विशेषकर डॉ. कविता यादव प्रकरण और दिल्ली नगर निगम बनाम महिला मस्टर रोल कर्मचारी मामले का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ कर्मचारी की सेवा श्रेणी पर निर्भर नहीं करता।

वेतन रोकना गैरकानूनी और अमानवीय

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि शिल्पी शुक्ला नियमित रूप से शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रही थीं। केवल ‘अतिथि’ कर्मचारी होने के आधार पर मातृत्व अवकाश अवधि का वेतन रोकना गैरकानूनी और अमानवीय है।

हाई कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि तीन माह के भीतर याचिकाकर्ता को मातृत्व अवकाश अवधि का पूरा बकाया वेतन भुगतान किया जाए।

दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला प्रदेश सहित देशभर में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अतिथि महिला कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है। इससे मातृत्व अधिकारों को लेकर समानता और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूती मिलेगी।

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