साईंस कालेज, दुर्ग में विशाल भारत दिवस का भव्य आयोजन देश की सुरक्षा के प्रति जनसामान्य को सजग होना जरूरी-गोलोक बिहारी रॉय

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दुर्ग। जन सामान्य को देश की सुरक्षा के प्रति सजग होना आवश्यक है। केवल सेना अथवा पुलिस के भरोसे किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा संभव नहीं है। ये उद्‌गार अति विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सुख्ता जागरण मंच के संगठन महासचिव श्री गोलोक बिहारी राय जी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के राधा कृष्णन सभागार में व्यक्त किये। श्री रॉय बड़ी संख्या में उपस्थित प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं एवं गणमान्य नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। श्री गोलोक बिहारी जी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में विषम परिस्थितियों में हमारे सैनिक कार्य करते है। हमारे राष्ट्र की सीमा का प्रथम प्रहरी हमारा नागरिक होता है। हमें अपने अस्तित्व का सही ज्ञान आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी जी के विचारों में यदि भारत नहीं रहेगा तो वैश्विक मानवता मर जायेगी। श्री रॉय के शब्दों में भारत का सांस्कृतिक सह-अस्तित्व के साथ विस्तार हुआ। हमारा भारत क्षेत्रीय समन्वय, क्षेत्रीय सहयोग एवं स‌द्भाव पर आधारित है। श्री रॉय ने वर्तमान समय में भारतीय परिसंघ की स्थापना पर बल दिया, जो विश्व शांति एवं सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दे।

कार्यक्रम के संयोजक राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ शकील हुसैन ने विशाल भारत दिवस के आयोजन की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. शकील हुसैन ने अनेकता में एकता भारत की विशेषता से जोड़ते हुए अनेक उदाहरणों के माध्यम से विशाल भारत दिवस के विषय में जानकारी दी। डॉ हुसैन ने विषय प्रस्तावना भी प्रस्तुत की। द्वीप प्रज्जवलन सरस्वती पूजन, वंदे मातरम् तथा राज्य गीत अरपा पैरी के धार की प्रस्तुति के साथ आरंभ हुये कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं श्रीफल, शॉल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर प्राचार्य डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ अभिनेष सुराना, डॉ. जगजांत कौर सलूजा, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. एस.डी. देशमुख, डॉ. सतीष कुमार सेन तथा डॉ. राकेश रंजन सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ शकील हुसैन द्वारा लिखित पुस्तकों का वितरण भी अतिथियों को किया गया।

अपने स्वागत भाषण में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि भूमि हमारी माता है तथा हम सब इसके पुत्र है। हमारी साझी संस्कृति, तथा तीर्थ परंपरा अनूठी है। सत्य एक है. इसे लोक अलग-अलग ढंग से निरूपित करते हैं। डॉ. सिंह ने इण्डोनेशिया, कम्बोडिया, मलेशिया, म्यांमार तिब्बत एवं जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि विशाल भारत राजनैतिक सीमाओं से परे है। राष्ट्र के युवाओं को जड़ो से जुड़कर श्रेष्ठ भारत का निर्माण करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर श्रीवास जी ने अपने संबोधन में विशाल भारत दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की ताकत सभ्यता एवं संस्कृति है। यह समर्पण एवं अर्पण की भूमि है। हमारी नदियों तथा तीर्थ महत्वपूर्ण है। भारत की व्यापक सीमा का उल्लेख करते हुए श्री गौरी शंकर ने कहा कि हमें इसे राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद क बिना सुखी समाज असंभव है। उनके शब्दों में विशाल भारत विश्व के प्रति सद्भावना व्यक्त करता है।

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति डॉ एन.पी. दीक्षित ने अपने उद्‌गार व्यक्त करते हुए कहा कि आज युवा पीढ़ी को भारत के विशाल इतिहास को जानने की आवश्यकता है। विशाल भारत एकता का परिचायक है। भारत का प्रभाव पूरे एशिया में मिलता है तथा विभिन्न एशियाई देशों में भारतीय नागरिकों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। अन्य विशिष्ट वक्ता शासकीय योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के प्राध्यापक डॉ कीर्तन कुमार साहू ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में परिवर्तन युवा पीढ़ी ही ला सकती है। डॉ साहू ने विशाल भारत की अवधारणा को सांस्कृतिक अवधारणा बताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय जागरण मंच के श्री पीएन पाण्डेय भी उपस्थित थे। प्रमुख गणमान्य नागरिकों में में श्री एवं श्रीमती खिचरिया, श्री गोकुल मोदी

सुश्री ज्योत्सना मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं प्राध्यापकगण उपस्थित थे। राष्ट्रगान जन गण मन की प्रस्तुति के साथ समाप्त हुये इस कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन राजनीति शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तरूण साहू ने दिया।

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