दंतेवाड़ा के तत्कालीन DEO सुभाष गंजीर को 4 साल की सजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में कोर्ट का फैसला

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दंतेवाड़ा, 31 अगस्त 2026। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दंतेवाड़ा के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुभाष गंजीर को विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा ने दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

मामले में विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने 31 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का दोषी माना।

2017 में दर्ज हुआ था मामला

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने तत्कालीन DEO सुभाष गंजीर के खिलाफ अपराध क्रमांक 04/2017 के तहत मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत कार्रवाई की गई थी।

ACB को शिकायत और सूचना मिली थी कि सुभाष गंजीर ने अपने पदस्थापना काल के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति स्वयं और परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित की है। सूचना के सत्यापन के बाद 14 फरवरी 2017 को अपराध पंजीबद्ध किया गया।

दंतेवाड़ा से ओडिशा तक हुई थी छापेमारी

मामला दर्ज होने के बाद ACB ने विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया। इसके बाद 15 फरवरी 2017 को आरोपी से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया।

ACB की टीम ने दंतेवाड़ा स्थित आरोपी के शासकीय आवास के अलावा वृंदावन कॉलोनी, जगदलपुर और उनके पैतृक गांव कोटपाड़, जिला कोरापुट (ओडिशा) में भी तलाशी ली थी।

तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर ACB ने मामले की विस्तृत जांच आगे बढ़ाई।

अभियोजन स्वीकृति के बाद कोर्ट में पेश हुआ चालान

जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। इसके बाद ACB ने अभियोग पत्र तैयार कर विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा में प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की थी।

कोर्ट ने सुनाई 4 साल के सश्रम कारावास की सजा

मामले में विचारण पूरा होने के बाद विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने 31 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने सुभाष गंजीर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

अदालत के इस फैसले के बाद आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

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