बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CG TET) 2024 के परिणाम से जुड़ी 20 अभ्यर्थियों की याचिकाओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने फाइनल आंसर-की में हटाए गए पांच प्रश्नों को दोबारा शामिल करने और उनके आधार पर प्राप्त अंकों को मान्य करने की मांग की थी। इन अभ्यर्थियों के अंक 74.5 से 74.9 के बीच थे, जबकि संबंधित श्रेणियों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक 75 निर्धारित थे।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा और अकादमिक मूल्यांकन से जुड़े मामलों में अदालत विशेषज्ञों की राय में तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक निर्णय स्पष्ट रूप से मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या कानून के विपरीत साबित न हो।
मॉडल आंसर-की के आधार पर क्वालिफाइंग होने का दावा
CG TET 2024 परीक्षा के बाद व्यापमं ने मॉडल आंसर-की जारी कर अभ्यर्थियों से दावा-आपत्तियां मंगाई थीं। लिकेश सिंह भारद्वाज, सन्मान राम, शैलेश कुमार टंडन समेत 20 अभ्यर्थियों ने दावा किया कि मॉडल आंसर-की के आधार पर उनके अंक न्यूनतम क्वालिफाइंग स्तर तक पहुंच रहे थे।
हालांकि, दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद जब व्यापमं ने फाइनल आंसर-की और परीक्षा परिणाम जारी किया, तो हिंदी विषय के एक गद्यांश से संबंधित पांच प्रश्नों को निरस्त कर दिया गया। इन प्रश्नों के हटाए जाने से याचिकाकर्ताओं के अंक घटकर 74.5 से 74.9 के बीच रह गए।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम पात्रता अंक 75 थे। उनका तर्क था कि संबंधित प्रश्नों को परीक्षा निर्देशों के अनुसार निरस्त नहीं किया जा सकता था।
प्रश्नों और गद्यांश का क्रम गलत होने से आई समस्या
मामले में छत्तीसगढ़ व्यापमं की ओर से बताया गया कि विवादित पांचों प्रश्न एक ही गद्यांश पर आधारित थे। परीक्षा के कुछ सेटों में प्रिंटिंग संबंधी त्रुटि के कारण गद्यांश और उससे संबंधित प्रश्न सही क्रम में प्रकाशित नहीं हुए थे।
इस वजह से अभ्यर्थियों के सामने गद्यांश उपलब्ध होने से पहले ही उससे संबंधित प्रश्न आ गए थे। मामले को विषय विशेषज्ञों की समिति के समक्ष रखा गया। समिति ने सभी सेट में संबंधित प्रश्नों को निरस्त करने की सिफारिश की, ताकि परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार हो सके।
हटाए गए प्रश्नों के अंक सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से मिले
व्यापमं ने कोर्ट को बताया कि निरस्त किए गए प्रश्नों के अंक परीक्षा निर्देशों में निर्धारित फार्मूले के अनुसार सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिए गए थे। यानी प्रश्न हटाने का प्रभाव किसी एक अभ्यर्थी या वर्ग तक सीमित नहीं रहा।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और प्रक्रिया का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रश्नों को हटाने का निर्णय बिना विचार किए नहीं लिया गया था। विषय विशेषज्ञों की समिति ने गद्यांश और प्रश्नों के गलत क्रम के कारण अभ्यर्थियों को होने वाली संभावित परेशानी पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिश दी थी।
मॉडल आंसर-की से अभ्यर्थी का कानूनी अधिकार तय नहीं होता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रोविजनल या मॉडल आंसर-की के आधार पर किसी अभ्यर्थी के क्वालिफाइंग अंक प्राप्त कर लेने मात्र से उसका कोई कानूनी अधिकार नहीं बन जाता। परीक्षा का अंतिम परिणाम फाइनल आंसर-की के आधार पर तैयार किया जाता है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फाइनल आंसर-की दावा-आपत्तियों और विशेषज्ञों की राय पर विचार करने के बाद तैयार की गई थी। संबंधित प्रश्नों को हटाने की प्रक्रिया सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हुई और निरस्त प्रश्नों के अंक भी निर्धारित नियम के अनुसार समान रूप से दिए गए।
हाईकोर्ट ने 20 याचिकाएं की खारिज
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता फाइनल आंसर-की तैयार करने की प्रक्रिया में कोई स्पष्ट मनमानी, दुर्भावना या कानूनी त्रुटि साबित नहीं कर सके। ऐसे में विशेषज्ञ समिति की राय और परीक्षा प्राधिकरण के निर्णय में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने CG TET 2024 में हटाए गए प्रश्नों को दोबारा शामिल करने की मांग वाली सभी 20 याचिकाओं को खारिज कर दिया।


